कृषि टास्क फोर्स की बैठक में सहकारिता विभाग के अधिकारियों को जिलाधिकारी ने जमकर लगाई फटकार. हाड़ कंपा देने वाले इस ठंड में चलने लगा था सहकारिता विभाग के अधिकारियों का पसीना. डीएम ने कहा जब शत प्रतिशत हो गई है जिले में धान की कटनी उसके बाद भी अब तक क्यो हुआ है मात्र 17 प्रतिशत खरीदारी.
द जनमित्र । एस कुमार विमल
बक्सर : जिला प्रशासन एवं सहकारिता विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के कारण जिले में धान अधिप्राप्ति के लक्ष्य से जिला कोशो दूर है. आलम यह है कि अधिकांश किसानों ने सहकारी समितियों के मनमानी से तंग आकर अपनी उपज व्यापारियों को औने पौने दाम में बेच दिया है. जिला कृषि टास्क फोर्स के बैठक के दौरान धान अधिप्राप्ति का आंकड़ा देख जिलाधिकारी भी हैरान रह गए कि, जिले में शत प्रतिशत धान की कटनी हो जाने के बाद भी मात्र 17 प्रतिशत ही धान की खरीददारी हुई है. इस दौरान जिलाधिकारी का सख्त तेवर देख हाड़ कंपा देने वाली इस ठंड में सहकारिता विभाग के अधिकारियों का पसीना छूट रहा था. जिलाधिकारी ने कहा निर्धारित समय से पहले लक्ष्य को पूरा करे. वरना अंजाम भुगतने के लिए अधिकारी तैयार रहे.
किसानों के धान बिक्री होने के बाद अधिकारियो की टूटी नींद
जिले में 15 नवम्बर से 15 फरवरी तक एक लाख 75 हजार मीट्रिक टन धान अधिप्राप्ति का लक्ष्य निर्धारित किया गया था. ऑन लाइन रजिस्ट्रेशन कराने के बाद भी जब पैक्स एवं व्यपार मंडल के द्वारा किसानों की धान की खरीदारी नही की गई तो, किसानों ने अपने धान व्यपारिययों को बेच दी. सरकारी समितियो के द्वारा मात्र 17 प्रतिशत ही अब तक धान की खरीदारी की गई है. जो लक्ष्य से कोशो दूर है. 27 जनवरी को जिले में मुख्यमंत्री के दौरे का जब कार्यक्रम तय हुआ तो अधिकारियो की नींद टूटी. अब आननफानन में किसी तरह से लक्ष्य को पूरा करने के लिए अब अधिकारी हाथ पैर मार रहे है. आलम यह है कि अधिकांश किसानों ने अपनी उपज को व्यपारियो के हाथों में बेच दिया है.

कृषि टास्क फोर्स की बैठक में जिलाधिकारी ने लगाया फटकार
जिले के ब्रह्मपुर प्रखण्ड में 27 जनवरी को मुख्यमंत्री का आगमन होने वाला है. इससे पहले सभी विभाग के अधिकारी अपनी नकामी पर पर्दा डालने के लिए बही खाता ठीक करने में लग गए है. इस दैरान जब जिलाधिकारी ने कृषि टास्क फोर्स की बैठक बुलाई तो, अधिकारियो ने जो आंकड़ा दिखाया उसे देखकर जिलाधिकारी भी हैरान हो गए. जिले में धान की कटनी शत प्रतिशत समाप्त होने के बाद भी धान की अधिप्राप्ति मात्र 17 प्रतिशत ही हुई है. इस दौरान जिलाधिकारी ने सहकारिता विभाग के अधिकारियों को जमकर फटकार लगाते हुए कहा की निर्धारित अवधि से पहले लक्ष्य को पूरा करे, वरना अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहे.
कहा से होगा धान की खरीदारी
वही विभागीय आधिकारिक सूत्रों की माने तो अब विभाग व्यापारियों और मिलरों से साठ गांठ कर व्यपारियो से किसानों के नाम पर सीधे धान की खरीदारी कर अपनी नकामी पर पर्दा डालने की तैयारी में है. क्योंकि जिन किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराई थी उसने धान व्यपारियो को बेच दिया है.
गौरतलब है कि जिले में किसानों के साथ पैक्स एवं व्यपार मंडल के कर्मीयों की दुर्व्यवहार ने उन्हें औने पौने दाम में व्यपारियो के हाथों धान बेचने को मजबूर कर दिया. सरकारी समितियां किसानों से ही धान की पालदारी, वजन, बोरे एवं वहन खर्च के अलावे प्रति क्विंटल 5 किलो अधिक धान की वसूली करते थे. जिससे परेशान किसानो ने पैक्स में जाने के बजाए व्यपारियो को धान बेच दिया.

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