स्थानीय

‘देहात’ संस्था के अधिकारियों ने अपने संस्था से जुड़े कर्मियों को किया सम्मानित

Spread the love

किसानों के बीच पहुँचकर उनकी समस्याओं का निदान करने वाली संस्था “देहात’ के अधिकारियो ने अपने संस्थान से जुड़े कर्मीयो को किया सम्मानित. रवि फसल की बुवाई में किसानो के खेतों की पगडंडियों तक पहुँचकर गुणवत्ता युक्त बीज एवं उर्वरक उपलब्ध कराने का दिया निर्देश.

द जनमित्र । विमल यादव

बक्सर : किसानों के बीच पहुँचकर उनकी समस्याओं को दूर करने वाली संस्था “देहात’ के वरीय अधिकारियो ने अपने संस्थान से जुड़कर किसानों के हित में काम करने वाले लोगो को शहर के एक निजी होटल में सम्मानित करने के साथ ही रवि फसल की बुवाई में पूरे ज़ोश-खरोश के साथ किसानों को बाजार से गुणवत्ता युक्त बीज एवं उर्वरक उपलब्ध कराने का सख्त निर्देश दिया. इस दौरान संस्थान से जुड़े कर्मीयो ने किसानों की समस्याओं पर खुलकर परिचर्चा की.

क्या कहते है संस्थान के अधिकारी

देहात के सीनियर आरबीएम राकेश रौशन ने बताया की देहात संस्था किसानों के हित के लिए प्रतिबद्ध है. जिसके लिए हम गांव और पंचायत लेवल पर रिटेलर्स को जोड़ रखे हैं, और उनके माध्यम से विभिन्न सुविधाओं को जैसे मौसम आधारित बीमा, खाद की सप्लाई, ऑनलाइन कृषि उत्पादों के ऑर्डर एंड होम डिलीवरी, टोल फ्री नंबर से किसानों को उचित सलाह, वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से पशुओं से जुड़ी समस्याओं का निदान, मिट्टी जांच आदि अनेकों सुविधाएं किसानों तक पहुंचाते हैं. जिसका टैग लाइन है “बीज से बाजार तक” यानी किसानों को धान गेहूं की खरीद में मदद कर उन्हें बाजार तक पहुंचाने में सहयोग करते है. हमारा सपना है एग्रिकल्चर टेक को हर किसान तक पहुंचना और भारत के हर किसान को हाईटेक एग्रिकल्चर से जोड़ना, ताकि उनकी लाइफ भी चेंज हो. हम उसी सपने को साकार करने हेतु दिन रात किसानों के साथ जुड़कर काम कर रहे.

क्या कहते है किसान

वही जिले के किसानो ने बताया कि आज भी पूर्ण रूप से कृषि पर निर्भर किसानों को किसी भी सरकारी योजना का लाभ नही मिल पा रहा है. सरकार भी जानती है कि खेतो में काम करने वाले किसानों के घर में न तो न्यूज़ पेपर आता है और न ही ऑनलाइन आवेदन करने में वह सक्षम है. विभाग ने भी किसानों के सहयोग के लिए जिन कृषि समन्वयकों एवं सलाहकारों की नियुक्ति की है वह भी बडे किसानों के दरवाजे पर बैठकर उन्ही को सभी योजनाओं को लाभ दे देते है. ऐसे में कोई संस्था अपना उत्पाद बेचने के लिए ही सही उचित सलाह देता है तो हमारे लिए लाभप्रद है.

गौरतलब है कि जिले में छिटपुट धान फसल की कटनी शुरू होने के साथ ही किसानों ने दलहनी एवं तेलहनी फसलों की बुवाई शुरू कर दी है. आज भी अधिकांश किसान जानकारी के अभाव में आधुनिक तरीके से खेतों की बुवाई करने के बजाए पारंपरिक तरीके से ही खेती का कार्य करते है. जिसमे लागत अधिक लगने के बाद भी उम्मीद के अनुरूप उत्पादन नही होता है.

Comment here