स्थानीय

जिले में 15 नवम्बर से होगी धान की खरीददारी, नहीं चलेगा नमी का बहाना.

Spread the love

जिले में 15 नवम्बर से होगी धान की खरीददारी, नहीं चलेगा नमी का बहाना. जिलाधकारी के निर्देश के बाद अन्नदाताओं में उत्साह अब तक 4 हजार लोगों ने धान की फसल बेचने के लिए ऑन लाइन किया रजिस्ट्रेशन.

द जनमित्र | सरिता कुमारी

बक्सर : जिले के डुमराँव एवं बक्सर अनुमण्डल में हुए धान की बम्बर उत्पादन के बाद कॄषि वैज्ञानिकों से लेकर किसान तक उत्साहित है. हथिया नक्षत्र से ठीक पहले हुए बारिश ने किसानों के निराशा को आशा में बदल दिया. और भयंकर सुखाड़ से जूझ रहे किसानों के लिए वह बारिश वरदान साबित हुई. 15 नवम्बर से जिले के ग्यारहों प्रखण्ड में धान की खरीददारी शुरू हो जाएगी. जिलाधिकारी ने पैक्स एवं व्यापार मंडल के साथ ही कृषि विभाग के अधिकारियो के साथ बैठक कर लापरवाही नही बरतने का सख्त निर्देश दिया है.

2 लाख 22 हजार 916 किसानों किसानों ने लगाई है धान की फसल

जिले के ग्यारहों प्रखण्ड में कुल रजिस्टर्ड 2 लाख 22 हजार 916 किसानों के द्वारा 98 हजार 088 हेक्टेयर भूमि पर धान फसल की खेती की गई है. धान फसल की कटनी शुरू होने के साथ ही जिला प्रशासन के अधिकारी सरकारी दर पर अन्नदाताओं की उपज को खरीदने के लिए तैयार है. साधारण धान की खरीददारी 2183 रुपये प्रति क्विंटल, जबकि ग्रेड ए धान 2203 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीददारी पैक्स, एवं व्यपार मंडल के द्वारा किया जाएगा.

क्या कहते है जिलाधिकारी

धान अधिप्राप्ति को लेकर जिला अधिकारी अंशुल अग्रवाल ने बताया कि, 15 नवंबर से जिले के दोनों अनुमंडल में धान की खरीदारी शुरू हो जाएगी. व्यापार मंडल एवं पैक्स के साथ ही कृषि विभाग कर्मियों को भी यह सख्त निर्देश दिया गया है की, अधिक से अधिक किसानों को जागरूक किया जाए साथ ही ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने में उनको सहयोग करे. सरकारी दर पर अपने धन का बिक्री किसान कर सके और कोई गड़बड़ी न हो, उसके लिए कई स्तर पर तैयारी की गई है. अब तक 4 हजार किसानो ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराई है. सरकार के द्वारा साधारण धान के लिए 2183 रुपए प्रति क्विंटल, जबकि ग्रेड ए के धान के लिए 2203 ₹ प्रति क्विंटल का दर निर्धारित किया गया है.

क्या कहते हैं सीनियर कृषि वैज्ञानिक

वही कृषि विज्ञान केंद्र लाल गंज के सीनियर कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर देवकरण सिंह ने बताया कि, इस बार जिले में धान का बंपर उत्पादन हुआ है. हथिया नक्षत्र से ठीक पहले हुई बारिश ने किसानों की निराशा को आशा में बदल दिया. जो खरीफ के साथ ही रवि फसल के लिए भी वरदान साबित हुआ है.

क्या कहते हैं किसान

जिले के किसानों ने बताया कि रोहिणी नक्षत्र में बिछड़ा डालने से लेकर रोपनी तक भयंकर सुखाड़ का सामना करना पड़ा था. लेकिन हथिया नक्षत्र से ठीक पहले हुई बारिश ने हारी हुई बाजी को जीत में बदल दी. धान की कटनी शुरूं हो गई है. खेतो में लहलहाती फसल को देख मन प्रसन्न है कि, साहूकारों का कर्ज देने के साथ ही परिवार का भरण पोषण करने में सहयोग मिलेगा.

गौरतलब है धान अधिप्राप्ति को लेकर राजधानी पटना से लेकर बक्सर तक कई दौर की बैठक हो चुकी है. प्रत्येक साल सरकार क्रय मूल्य का निर्धारण तो करती है लेकिन जब किसान मिल में पैक्स के माध्यम से अपनी उपज लेकर पहुँचते है, तो पैक्स कर्मीयो से लेकर मिल मालिकों के द्वारा मनमाने तरीके से उसका कीमत लगाया जाता है.

Comment here