राजनीति

एक साल पुराने मामले में प्रत्याशी गिरफ़्तार, समर्थकों में उबाल

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द जनमित्र डेस्क

बिहार विधानसभा चुनाव के नामांकन प्रक्रिया के अंतिम दिन राजपुर (सुरक्षित) विधानसभा क्षेत्र से आजाद समाज पार्टी के प्रत्याशी और भीम आर्मी से जुड़े अनिल प्रधान को शनिवार शाम नामांकन दाखिल करने के तुरंत बाद पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई से क्षेत्र में तनाव फैल गया और समर्थकों में भारी आक्रोश देखा गया। विपक्षी दलों ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है, जबकि पुलिस ने इसे एक पुराने आपराधिक मामले से जोड़ा है।

सूत्रों के मुताबिक, अनिल प्रधान ने देर शाम करीब सात बजे बक्सर अनुमंडल कार्यालय में राजपुर सीट से नामांकन पत्र दाखिल किया। जैसे ही वे बाहर निकले, नगर थाना अध्यक्ष मनोज कुमार यादव के नेतृत्व में पहुंची पुलिस टीम ने उन्हें हिरासत में ले लिया। गिरफ्तारी के दौरान उनके सैकड़ों समर्थकों ने नारेबाजी की और पुलिस हिरासत में ही उन्हें फूल-मालाओं से सम्मानित किया। भीड़ ने ‘अनिल प्रधान जिंदाबाद’ और ‘पुलिस वापस जाओ’ के नारे लगाए, जिससे माहौल गरमा गया।

समर्थकों ने आरोप लगाया कि यह गिरफ्तारी पूरी तरह राजनीतिक साजिश का हिस्सा है। उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने बिना किसी वारंट या पूर्व नोटिस के कार्रवाई की है। गिरफ्तारी के बाद अनिल प्रधान ने मीडिया से बातचीत में कहा, “मैंने राजपुर सुरक्षित सीट से नामांकन किया है, लेकिन पुलिस ने बिना कोई कागजात या नोटिस दिखाए मुझे हिरासत में ले लिया। यह लोकतंत्र की हत्या है।” प्रधान ने चेतावनी दी कि वे इस अन्याय के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।

पुराने मामले में कार्रवाई: धोखाधड़ी और धमकी के आरोप
नगर थानाध्यक्ष मनोज कुमार यादव ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी एक साल पुराने मामले से संबंधित है, जिसमें अनिल प्रधान पर फर्जी आधार कार्ड बनवाने, धोखाधड़ी और जान से मारने की धमकी देने का गंभीर आरोप है। पीड़िता नासरीन खातून ने मार्च 2025 में नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।

नासरीन के मुताबिक, उनकी मुलाकात अनिल प्रधान से कुछ समय पहले हुई थी। आरोप है कि प्रधान ने जाली कागजात तैयार कर ‘पूजा कुमारी’ नाम से नकली आधार कार्ड बनवाया, जिसमें पिता का नाम गुलाब राम और पता मठिया मुहल्ला, वार्ड संख्या 33, बक्सर अंकित था। इसी नकली पहचान का इस्तेमाल कर उन्होंने अशोक कुमार पाठक के खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज करवाया और ‘समझौता’ के नाम पर उनसे करीब दो लाख रुपये वसूल लिए।

पीड़िता ने पुलिस आवेदन में विस्तार से बताया कि 6 मार्च 2025 को अनिल प्रधान ने उन्हें ज्योति चौक स्थित अंबेडकर छात्रावास बुलाया, जहां ‘एससी/एसटी थाना प्रभारी मोना मैडम’ के नाम से फर्जी आवेदन लिखवाया। अगले दिन, 7 मार्च को प्रधान ने अपनी सफेद स्कॉर्पियो गाड़ी से नासरीन को एसपी कार्यालय के बाहर छोड़ दिया और फरार हो गया। नासरीन ने बयान में कहा, “अनिल प्रधान ने मुझे इस केस में फंसा दिया और बाद में जान से मारने की धमकी दी। मुझे उनसे जान का खतरा है।”

पुलिस ने मामले की जांच के बाद लंबे समय से चल रही कार्रवाई को अंजाम दिया। फिलहाल, अनिल प्रधान को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इस घटना ने चुनावी माहौल को और गरमा दिया है, और विपक्षी नेता इसे दबाव की राजनीति बता रहे हैं। क्षेत्रीय अधिकारियों ने तनाव कम करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने की घोषणा की है।

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