राजनीति

विधायक ने उठाई भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में जगह देने की मांग

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द जनमित्र डेस्क

बिहार विधानसभा के चल रहे मानसून सत्र के दौरान बक्सर सदर से विधायक आनंद मिश्रा ने भोजपुरी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मजबूत वकालत की। उन्होंने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि भोजपुरी महज कोई बोली नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की सांस्कृतिक जड़ों, परंपराओं, रोजमर्रा की जिंदगी और भावनाओं से जुड़ी पहचान है।

विधायक ने जोर देते हुए कहा कि इस भाषा को संवैधानिक दर्जा देकर उसका उचित सम्मान सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने भोजपुरी के गौरवशाली अतीत का जिक्र करते हुए बताया कि साहित्य, लोकगीतों, नृत्यों, रंगमंच और फिल्मों के जरिए यह भाषा न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया के कई हिस्सों में अपनी विशिष्ट छाप छोड़ चुकी है।

भारत के साथ-साथ नेपाल, मॉरीशस, फिजी, सूरीनाम और त्रिनिदाद एवं टोबैगो जैसे देशों में भी बड़ी आबादी भोजपुरी बोलती और समझती है।

मिश्रा ने सदन में यह भी रेखांकित किया कि भोजपुरी भारतीय संस्कृति की अहम धरोहर होने के बावजूद अब तक संविधान की आठवीं अनुसूची में जगह नहीं पा सकी है। उन्होंने इसे करोड़ों भोजपुरी भाषियों की लंबे अरसे से चली आ रही मांग बताया और केंद्र सरकार से इस मसले पर सकारात्मक रुख अपनाने की अपील की।

विधायक का तर्क था कि आठवीं अनुसूची में शामिल होने से भाषा के संरक्षण और विकास को नई रफ्तार मिलेगी। शिक्षा, साहित्य, प्रशासनिक कामकाज और प्रतियोगी परीक्षाओं में भी भोजपुरी को उचित स्थान मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि यह फैसला आने वाली पीढ़ियों को अपनी मातृभाषा और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का अवसर देगा।

उन्होंने साफ कहा कि भोजपुरी का सम्मान सिर्फ एक भाषा का सम्मान नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक बहुलता और विरासत का सम्मान है। इसलिए सरकार को इस दिशा में जल्द कदम उठाने चाहिए।

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