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परचमः बक्सर के हेमंत ने यूपीएससी में 13वां रैंक हासिल किया

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द जनमित्र | शशि

यूपी के मिर्जापुर में बतौर एसडीएम तैनात बक्सर के हेमंत ने अपनी मेहनत और लगन से यूपीएससी 2024 में 13वीं रैंक हासिल कर IAS बनने का गौरव प्राप्त किया। हेमंत मूल रूप से बिहार के राजपुर प्रखंड, कुसुरपा गांव के रहने वाले हैं, हालांकि उनका परिवार अब बक्सर के धोबीघाट मुहल्ले में बसता है। उनके पिता ओम प्रकाश मिश्रा भभुआ में शिक्षा विभाग में APO के पद पर कार्यरत हैं, तो मां नम्रता मिश्रा कभी वुडस्टॉक स्कूल में शिक्षिका रहीं और अब इटाढ़ी के पकड़ी मोड़ पर स्कूल चलाती हैं। हेमंत के छोटे भाई शिशिर मिश्रा IIT गुवाहाटी से पढ़े हुए हैं और ओरेकल में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं।

हेमंत की पढ़ाई का सफर भी प्रेरणादायक है। बक्सर के वुडस्टॉक स्कूल से मैट्रिक में 10 CGPA के साथ टॉप किया। पांचवीं कक्षा से ही स्कॉलरशिप हासिल करते रहे और 2013 में मैट्रिक पास की। फिर पटना के डीएवी BSEB से ISC में 85% अंक लाए। इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से जियोग्राफी में बीएससी और JNU से उसी विषय में एमए किया। 2019 में JRF में तीसरी रैंक भी हासिल की, लेकिन उनका सपना सिविल सेवा था, जिसके लिए वे जुटे रहे।
पढ़ाई के प्रति उनकी प्रतिबद्धता तब और साफ हुई जब 2022 में UPPCS क्रैक कर सातवीं रैंक के साथ DSP बने, पर जॉइन नहीं किया। फिर 2024 में UPPCS में नौवीं रैंक लाकर मिर्जापुर के एसडीएम बने। इसी बीच बिहार PSC से इलेक्शन ऑफिसर के लिए चुने गए, लेकिन एसडीएम की जिम्मेदारी निभाते हुए तैयारी जारी रखी और आखिरकार IAS बन गए।
हेमंत अपनी कामयाबी का पूरा श्रेय माता-पिता को देते हैं। दादा स्व. श्रीनिवास मिश्रा और दादी स्व. रमावती देवी को याद करते हुए वे भावुक हो उठे। परिवार में खुशी का माहौल है। चाचा बजरंगी मिश्रा (जनसुराज सदस्य), बुआ अंजू दुबे और मां नम्रता की आंखें गर्व से छलक आईं। नम्रता ने कहा, “बेटे की सफलता से बहुत खुशी है। अच्छा इंसान बनना सबसे जरूरी है, और मुझे यकीन है मेरा बेटा अच्छा करेगा।”
यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, जनसुराज के तथागत हर्षवर्धन और डॉ. एडी उपाध्याय ने भी हेमंत को बधाई दी। हेमंत ने बताया, “फिलहाल यूपी में ही काम करना चाहता हूं, क्योंकि यहां पहले से प्रशासनिक अनुभव है। कोचिंग नहीं ली, सेल्फ स्टडी से यह मुकाम हासिल किया।” इंटरव्यू के बारे में पूछने पर बोले, “इंटरव्यू कठिन था। डिस्क्रिप्शन और डिसीजन मेकिंग पर सवाल आए, जिनका जवाब धैर्य से दिया।” उनका मानना है कि सफलता का मंत्र है- गलतियों से सीखना, सुधार करना और आगे बढ़ते रहना।

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