ग्राउंड रिपोर्ट

थानाध्यक्ष की पहल पर विधवा की शादी

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द जनमित्र । विमल यादव

बक्सर: सामाजिक स्तर पर विधवा अथवा विधुर होने के उपरांत महिला और पुरुष का जीवन नरक के समान हो जाता है. यदि ऐसे लोग दुबारा शादी करना चाहे तो भी समाज उन्हें गलत नजरों से देखता है. ऐसा ही एक मामला ब्रह्मपुर थाना क्षेत्र के रक्षा नगर गांव की विधवा महिला का है जिसका नाम है मुस्कान. इस महिला के पति का असमय निधन हो जाने के बाद 2 वर्षीय संतान के साथ अब अपना जीवन बिताने को विवश थी. इसी दौरान मुस्कान की जान पहचान ब्रह्मपुर गांव के ही स्थानीय निवासी सूरज कुमार साह से हो जाती है. दोनों के बीच फोन पर बातचीत शुरू हो जाती है और बातचीत के क्रम में ही दोनों के बीच प्रेम बढ़ने लगता है. दोनों के बीच प्रेम इतना बढ़ जाता है कि मामला शादी तक पहुंच जाता है लेकिन घरवालों से जब इनलोगो ने शादी का प्रस्ताव रखा तो इस रिश्ते को स्वीकार करने के लिए कोई भी तैयार नहीं हुआ. मजबूरन दोनों ने घर से भागने का फैसला लिया और जमशेदपुर पहुंच गए.

इधर दोनो के घरवालों ने थाने में महिला और पुरुष के गुम होने की शिकायत दर्ज करा दी. इसके बाद पुलिस ने जांच प्रारंभ किया तो मामला कुछ और निकला. बाद में उन्हें जमशेदपुर से बरामद कर लिया गया तथा जब पूछताछ की जाने लगी तो सारी सच्चाई सामने आई. तब जाकर थानाध्यक्ष ने पहल करते हुए परिवार के लोगों को थाने बुलाया और उन्हें समझा-बुझाकर इस विवाह के लिए तैयार कर लिया. थानाध्यक्ष बैजनाथ चौधरी ने स्वयं घराती बन सभी रस्मो को निभाते हुए बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ मंदिर में भगवान भोलेनाथ को साक्षी मानकर दोनों की शादी करा दी.

इस विवाह में सब इंस्पेक्टर गंगा दयाल ओझा ने भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इस दौरान मंदिर परिसर में उपस्थित महिलाओं ने मांगलिक गीत गाकर माहौल को खुशनुमा बना दिया. थानाध्यक्ष की तरफ से ही मंदिर में उपस्थित सभी लोगों के बीच मिष्ठान वितरण किया गया साथ ही थानाध्यक्ष ने दुल्हन को उसके नए घर के लिए विदा भी कर दिया. थानाध्यक्ष की इस अनोखी पहल से यह चर्चा का विषय बना हुआ है. क्षेत्र के लोग उनकी सराहना कर रहे हैं. थानाध्यक्ष का कहना है कि सभी को अपना जीवन जीने का अधिकार है और जब किसी का जीवन बेरंग हो जाए तो उसमें दुबारा रंग भरना कही से गलत नहीं है.

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