द जनमित्र डेस्क
मंगलवार सुबह दानापुर-डीडीयू रेलखंड पर एक दिल दहला देने वाली घटना में वाराणसी की एक युवती और उसकी तीन वर्षीय मासूम बेटी ट्रेन की चपेट में आकर जान गंवा बैठीं।
घटना विविगिरी हॉल्ट के निकट डाउन लाइन पर हुई। मृतका की पहचान गोरख देवी (22) के रूप में हुई है, जो वाराणसी के मंडुआडीह इलाके की रहने वाली थीं। उनकी तीन साल की बेटी लाडो भी इस हादसे में अपनी मां के साथ मारी गई।

जानकारी के अनुसार, गोरख देवी अपनी बेटी के साथ बक्सर जिले के कृष्णाब्रह्म थाना क्षेत्र अंतर्गत नोनियपुरा गांव में अपने रिश्तेदार के घर जा रही थीं। वे ट्रेन से डुमरांव स्टेशन पहुंचीं और वहां से अपनी भतीजी व बेटी के साथ रेलवे पटरी के किनारे पैदल गांव की ओर बढ़ रही थीं।
सुबह करीब सात बजे विविगिरी हॉल्ट के पास अचानक तेज गति वाली ट्रेन आ पहुंची। महिला को बचने का कोई मौका नहीं मिला और दोनों मां-बेटी ट्रेन की चपेट में आ गईं। टक्कर की तीव्रता इतनी अधिक थी कि दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। शव घटनास्थल से करीब 200 मीटर दूर तक फेंके गए मिले।
हादसे के बाद आरपीएफ और स्थानीय कृष्णाब्रह्म थाना पुलिस टीम मौके पर पहुंची। लेकिन परिजनों के आने का इंतजार करने के कारण शव कई घंटों तक ट्रैक के किनारे पड़े रहे। दोपहर करीब 2:40 बजे परिजन पहुंचने के बाद पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया।
इस देरी पर स्थानीय लोगों ने काफी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि ऐसी संवेदनशील घटनाओं में प्रशासन को तुरंत कार्रवाई कर शवों को सम्मानजनक तरीके से हटाना चाहिए।
कृष्णाब्रह्म थाना प्रभारी रवि कुमार ने बताया कि सूचना मिलते ही टीम शवों के पास पहुंची। चूंकि शव रेलवे की जमीन पर थे, इसलिए पहले जीआरपी को सूचित किया गया। जीआरपी ने शव आउटर क्षेत्र में होने का हवाला देते हुए उन्हें छूने से इनकार कर दिया। बाद में स्थानीय पुलिस ने शव अपने कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई की।

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