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मजदूर की मौत का मामलाः परिवार को मुआवजा व आजीवन पेंशन

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द जनमित्र डेस्क

चौसा थर्मल पावर प्लांट में काम कर रहे 22 वर्षीय मजदूर की पानी के तालाब में डूबने से हुई दुखद मौत के बाद देर रात तक चले तीखे विरोध प्रदर्शन का अंत हो गया है। कंपनी प्रबंधन और मृतक के परिजनों के बीच पहुंचे समझौते के तहत परिवार को 23 लाख रुपये का मुआवजा और माता-पिता को आजीवन मासिक पेंशन देने की सहमति बनी है।

समझौते के अनुसार, प्लांट प्रबंधन ने शुभम कुमार के परिवार को 23 लाख रुपये नगद मुआवजा देने पर हामी भरी है। साथ ही अंतिम संस्कार के लिए तुरंत 50 हजार रुपये नकद राशि उपलब्ध कराई गई। मृतक के माता-पिता को आजीवन 18 हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन (प्रत्येक को 9-9 हजार रुपये) मिलेगी।

यह समझौता स्थानीय जनप्रतिनिधि अभिमन्यु कुशवाहा के सक्रिय प्रयासों से संभव हो सका। प्रशासन के स्तर पर पीएफ और सरकारी राहत राशि दिलाने को लेकर भी चर्चा हुई है।

अभिमन्यु कुशवाहा ने बताया कि शुरुआती दौर में कंपनी उचित मुआवजे को लेकर तैयार नहीं दिख रही थी। श्रम कानूनों और नियमों का हवाला देने के बाद प्रबंधन 50 लाख रुपये एकमुश्त देने को राजी हुआ। परंतु परिवार की लंबी अवधि की आर्थिक सुरक्षा को देखते हुए अंत में 23 लाख रुपये नकद और आजीवन पेंशन का फॉर्मूला तय हुआ, जिससे परिवार को निरंतर सहारा मिल सके।

समझौते के बाद ग्रामीणों को समझा-बुझाकर सड़क जाम खुलवाया गया और परिजनों ने शव पुलिस को सौंप दिया। पोस्टमॉर्टम पूरा होने के बाद शुक्रवार सुबह शव परिवार को अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया गया।

यह हादसा गुरुवार को हुआ। राजपुर थाना क्षेत्र के देवढ़िया गांव के रहने वाले शुभम कुमार पिछले एक साल से प्लांट के सिविल विभाग में कार्यरत थे। ड्यूटी के दौरान वे प्लांट परिसर में बने पानी भंडारण तालाब के पास गए, जहां उनका पैर फिसल गया और वे गहरे पानी में डूब गए।

मौत की सूचना मिलते ही आक्रोशित परिजनों और स्थानीय लोगों ने प्लांट के पास बक्सर-रोहतास मार्ग को करीब पांच घंटे तक जाम कर रखा। स्थिति बिगड़ने के अंदेशे को देखते हुए CISF के जवान और राजपुर, मुफस्सिल तथा इटाढ़ी थाना की पुलिस टीम को तैनात किया गया था। शव को प्लांट परिसर में ही रखा गया और उचित मुआवजे की मांग जारी रही।

मजदूर नेता पप्पू पांडेय और रामप्रवेश सिंह घटनास्थल पर पहुंचे, लेकिन CISF ने उन्हें अंदर जाने से रोका। बाद में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ परिजन अंदर पहुंचे और अधिकारियों से बातचीत शुरू की। अभिमन्यु कुशवाहा के पहुंचने के बाद देर रात तक चली वार्ता में अंततः समझौता हो गया।

इंटक के जिला अध्यक्ष पप्पू पांडेय ने कहा कि प्लांट में करीब तीन हजार मजदूर कार्यरत हैं। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक स्थायी मानक तय होना चाहिए। उन्होंने बताया कि उनकी मांग 32 लाख रुपये मुआवजे की थी, जैसा कि पहले भी एक अन्य दुर्घटना में दिया गया था।

पप्पू पांडेय ने आरोप लगाया कि कुछ तत्वों ने स्थानीय राजनीति के चलते मजदूरों के व्यापक हितों से जुड़े मुद्दों को कमजोर करने की कोशिश की।

इस घटनाक्रम ने एक बार फिर SJVN थर्मल पावर प्लांट में कार्यरत मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था और कार्यस्थल पर सेफ्टी प्रोटोकॉल को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार हो रही दुर्घटनाओं को देखते हुए स्थानीय निवासी और मजदूर संगठन अब कंपनी से ठोस कदमों की उम्मीद लगाए हुए हैं, ताकि भविष्य में ऐसे हादसे रोके जा सकें।

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