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60 लाख की सड़क सात माह में ही चकनाचूर

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द जनमित्र डेस्क

नगर परिषद के विस्तारित इलाके में हाल ही में तैयार की गई एक अहम सड़क महज सात महीने में ही जर्जर होकर टूट-फूट रही है। करीब 60 लाख रुपये की लागत वाली इस पीसीसी सड़क की खस्ता हालत ने पूरे निर्माण कार्य की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान पुराने भोजपुर मिशन स्कूल के पश्चिमी छोर से भोजपुर पोखर तक करीब तीन किलोमीटर लंबी इस सड़क को बनवाया गया था। सूत्रों का कहना है कि काम के दौरान विभागीय दिशा-निर्देशों की धज्जियां उड़ाई गईं।

स्थानीय प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिशों के आरोप भी सामने आए हैं। हाई टेंशन बिजली के खंभे के नीचे बने सड़क के एक हिस्से को अंधेरी रात में अचानक तोड़ दिया गया। इससे सबूत नष्ट करने की आशंका जताई जा रही है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस योजना से जुड़ी सारी दस्तावेजी फाइल नगर परिषद कार्यालय से ही गायब हो गई है। आरोप है कि पूर्व जेई अंजनी कुमार अब नए सिरे से अनुमान और लागत-कैलकुलेशन तैयार करने में जुटे हुए हैं।

कार्यपालक अधिकारी राहुलधर दुबे ने जांच के आदेश दिए थे, लेकिन जेई इलिका कुमारी का रिपोर्ट अब तक अधर में लटका हुआ है।

जेई अंजनी कुमार का दावा है कि सड़क का काम ठेकेदार अशोक कुमार और तत्कालीन ईओ मनीष कुमार ने किसी गरीब ठेकेदार को मध्यस्थ बनाकर करवाया था। गड़बड़ी उसी मध्यस्थ की बताई जा रही है। उन्होंने टूटे हिस्से की मरम्मत कराने की बात कही, लेकिन फाइल गुम होने पर चुप्पी साध ली।

इधर लोक शिकायत विभाग ने इस अनियमितता की शिकायत पर 22 अप्रैल को सुनवाई तय की है। स्थानीय निवासियों में इस घटना को लेकर गुस्सा बढ़ता जा रहा है और उन्होंने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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