राजनीति

भाकपा माले (लिबरेशन) का 11वां जिला सम्मेलन शुरू

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द जनमित्र डेस्क

भाकपा माले (लिबरेशन) के ग्यारहवें जिला सम्मेलन की शुरुआत झंडोलोतन के साथ हुई। पार्टी के वेटरन लीडर कॉम मनोहर जी ने झंडा फहराया। इसके बाद शहीदों की याद में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की। सभी कार्यकर्ताओं ने बारी-बारी शहीद वेदी पर माल्यार्पण और पुष्प चढ़ाए।

उद्घाटन सत्र के दौरान मंच पर मुख्य अतिथि एवं उद्घाटनकर्ता पार्टी के राज्य सचिव कॉम कुणाल, पोलित ब्यूरो सदस्य कॉम अमर जी, पर्यवेक्षक कॉम राजू यादव, जिला सचिव कॉम नवीन कुमार, वरिष्ठ नेता व राज्य कमिटी सदस्य कॉम मनोहर जी, डुमरांव के पूर्व विधायक डॉ अजीत कुमार सिंह और ‘द जनमित्र’ के संपादक विमल कुमार सिंह मौजूद रहे। सभी मंचासीन नेताओं को गमछा देकर सम्मानित किया गया। सम्मेलन को इन सभी नेताओं ने संबोधित किया।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए राज्य सचिव कॉम कुणाल ने कहा कि आज देश और दुनिया गहरे संकट के दौर से गुजर रही है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर थोपा गया आपराधिक युद्ध पूरी दुनिया को अस्थिरता, आर्थिक तबाही और विश्व शांति के गंभीर खतरे की ओर धकेल रहा है। हम इस युद्ध की कड़ी निंदा करते हैं और शांति, संप्रभुता तथा जनता के अधिकारों के पक्ष में मजबूती से खड़े हैं।

उन्होंने कहा कि देश के भीतर हालात और भी चिंताजनक हैं। मोदी सरकार ने अमेरिका के सामने घुटने टेककर स्वतंत्र विदेश नीति की विरासत को कमजोर किया है और देश को ऊर्जा संकट तथा आर्थिक अस्थिरता की ओर धकेल दिया है। किसानों, मजदूरों और आम जनता के हितों को कुचलते हुए कॉरपोरेट घरानों के पक्ष में नीतियां बनाई जा रही हैं। चार लेबर कोड के जरिए मजदूरों के दशकों के संघर्ष से हासिल अधिकारों पर हमला किया गया है। यूनियन बनाने, हड़ताल करने और न्यायपूर्ण वेतन की मांग को सीमित किया जा रहा है तथा काम के घंटे मालिकों की मनमानी पर छोड़ दिए गए हैं। किसानों की जमीन जबरन छीनी जा रही है और विकास के नाम पर उन्हें उजाड़ा जा रहा है।

बिहार में भाजपा-जदयू गठबंधन ने दागदार एसआईआर, महिलाओं के खाते में 10 हजार रुपये और नीतीश कुमार को आगे रखकर चुनाव तो हड़प लिया, लेकिन अब भाजपा ने गृह व भूमि सुधार जैसे अहम विभाग नीतीश कुमार से छीन लिए हैं। महज तीन महीने के भीतर उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटाने की साजिश के जरिए बिहार में बुलडोजर राज स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए गए हैं। यह लोकतंत्र और जनता के फैसले का सीधा अपमान है।

कुणाल ने कहा कि सत्ता में आते ही बुलडोजर के सुनियोजित हमले शुरू हो गए। नालंदा, बेगूसराय, समस्तीपुर, दरभंगा, गया समेत पूरे बिहार में हजारों गरीबों, दलितों और वंचितों के घर तोड़े जा चुके हैं। लाखों परिवार बेघर होने की कगार पर हैं। चुनाव से पहले 10 हजार रुपये और चुनाव के बाद बुलडोजर-हिंसा-बलात्कार, आज के बिहार की यही सच्चाई है।

पूर्व विधायक डॉ अजीत कुमार सिंह और विमल कुमार सिंह सहित अन्य वक्ताओं ने कहा कि भूमि अधिग्रहण के नाम पर किसानों की जमीन छीनने की प्रवृत्ति तेज हो गई है। भारतमाला प्रोजेक्ट, राम-जानकी पथ और अन्य योजनाओं के नाम पर उपजाऊ जमीन औने-पौने दाम पर ली जा रही है। भागलपुर में अदानी समूह को सैकड़ों एकड़ जमीन कौड़ी के मोल सौंपी गई है। इससे बेदखली के साथ लाखों पेड़ काटने की भी योजना है।

वक्ताओं ने कहा कि तमाम दावों के बावजूद बिहार में उद्योग-धंधे चौपट हैं और रोजगार का कोई ठोस उपाय नहीं है। 65 प्रतिशत आरक्षण के मुद्दे पर सरकार का विश्वासघात उजागर हो चुका है। यूजीसी गाइडलाइन पर भी भाजपा-जदयू बेनकाब हो चुकी है। कैंपसों में जातीय उत्पीड़न रोकने के लिए सशक्त गाइडलाइन बनाने की मांग पर छात्र-युवा आंदोलित हैं, लेकिन सरकार इसे कमजोर करने में लगी है।

दलितों, वंचितों, अल्पसंख्यकों और महिलाओं पर हमले लगातार बढ़ रहे हैं। मॉब लिंचिंग, बलात्कार, दलित उत्पीड़न और डायन बताकर प्रताड़ना जैसी घटनाएं जारी हैं। शासन-प्रशासन हमलावरों को संरक्षण दे रहा है। नीट छात्रा बलात्कार-हत्याकांड ने सरकार की पोल खोल दी है।

वक्ताओं ने आह्वान किया कि बुलडोजर हमलों के खिलाफ पूरे बिहार में आंदोलन का शंखनाद हो चुका है। भाजपा अगर सोचती है कि सत्ता हड़पकर कुछ भी कर सकती है तो वह भ्रम में है। यह बिहार है जिसने हमेशा तानाशाहों को चुनौती दी है। आज फिर हमें संविधान, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और नागरिक अधिकारों की रक्षा की ऐतिहासिक भूमिका निभानी है।

सम्मेलन में जगन्नारायण शर्मा, हरेंद्र राम, ओम जी, राजदेव सिंह, वीरेंद्र यादव, अखिलेश ठाकुर, अंकित सिद्धार्थ, जितेंद्र राम, ऊषा देवी, रामदेव सिंह, कन्हैया महतो, कन्हैया राम, संजय शर्मा, सर्वेश पांडे, शिवजी राम, संध्या पाल, बीर बहादुर पासवान, संजय शर्मा समेत कई नेता मौजूद रहे।

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