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साहित्यकार हृषिकेश पाठक की रचनाएं समाज को देती है नई दिशा

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जनमित्र/बक्सर: चरित्रवन स्थित प्रतिश्रुति कार्यालय में प्रगतिशील लेखक संघ, निराला साहित्य परिषद एवं प्रतिश्रुति के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को साहित्यकार हृषिकेश पाठक के निधन पर शोक सभा का आयोजन हुआ. कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए साहित्यकार कुमार नयन ने कहा कि हृषिकेश पाठक की कहानी और कविताओं में आम जन की पीड़ा है. वे एक अच्छे रचनाकार थे.

इनके निधन से साहित्य जगत को एक अपूर्णीय क्षति हुई है. लेखक राममुरारी ने कहा कि हषिकेश पाठक की रचनाएं हमें समाज को देखने का नजरिया बदल देता है. उनकी कविता, कहानी और व्यंग से समाज को नयी दिशा मिली है. वामपंथी विचारक नूतन राय, पत्रकार कोशिक, विमल कुमार सिंह समेत अन्य ने कहा कि एक बेहतर समाज बनाने में साहित्य की बड़ी भूमिका होती है और हृषिकेश पाठक ने साहित्यिक रचनाओं से इस भूमिका को बेहतर तरिके से अदा किया है. साहित्य जगत में उनकी कमी हमेशा खलती रहेगी. अंत में सभी ने दो मिनट का मौन रख उन्हें श्रद्धांजलि दी. समीक्षक डॉ. दीपक कुमार राय ने टेलीफोन से ही हृषिकेश पाठक के प्रति संवेदना प्रकट की. इस अवसर पर इ. रामाधार सिंह, डॉ. एस.एन. दुबे, जीतेंद्र मिश्र, इ. गणेश दुबे, राम प्रसन्न द्विवेदी, शैलेंद्र कुमार ओझा, संजीव कुमार अग्रवाल समेत अन्य शामिल रहें. उल्लेखनीय है कि हृषिकेश पाठक सिमरी प्रखंड के नियाजीपुर गांव के रहने वाले थे. वे अवर अभियंता संघ के महामंत्री थे. अपने जीवन काल में कई कहानी, कविता और व्यंग को लिखे हैं. जिसमें स्याह सच, प्लेटफार्म की एक रात, अंखुलाते शूल, महर्षी उपमन्यु और उनके वंशज प्रमुख रूप से शामिल हैं.

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