जनमित्र: राष्ट्रवादी काॅग्रेस पार्टी के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष बिनोधर ओझा ने मोदी सरकार द्वारा घोषित नई शिक्षा नीति पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि इस नीति मे नया कुछ भी नही है. 1968 की पहली शिक्षा नीति, 1986 की दूसरी शिक्षा नीति और 1992 की संशोधित शिक्षा नीति तीनो मे कुल जीडीपी का 6% खर्च करने की योजना थी. मोदी द्वारा नई शिक्षा नीति मे भी जीडीपी का 6% ही खर्च कर विकसित करने की है. जबकी देश की जीडीपी इस समय 2 के आस पास है. नई शिक्षा नीति मे सभी महाविद्यालयो को स्वयतता की बात की गयी है और न्यूनतम शुल्क की बात कही गयी है. स्वयतता का अर्थ स्वतंत्रता से होता है जिसका शुल्क विद्यालय स्वयं निर्धारित करेगा. अधिक से अधिक और अच्छी शिक्षा के नाम पर शुल्क मे प्रतिस्पर्धा होगी. इस बात को स्वीकारते हुए शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट कहा भी है जबकी पीएम कुछ और कहते है.

इस नीति से शिक्षको का शारीरिक , मानसिक और अभिभावकों का आर्थिक शोषण होगा. एचआईडी के सर्वे के अनुसार 189 देशो मे भारत का स्थान 129 वा है. छोटे छोटे देश भूटान जिम्बावे अपने जीडीपी का साढे सात फिसदी खर्च करता है. व्यवसायिक शिक्षा की बात बहुत पहले से सरकारी स्कूलो मे कागज पर है. इस शिक्षा नीति मे 50% लोगो को व्यवसायिक शिक्षा दी जायेगी. वैसी स्थिति मे 50% लोग उनके श्रमिक होगे ?

नौकरी के लिए राज्य सेवा आयोग, युनियन सर्विस कमीशन ,पुलिस और न्यायिक सेवा के अलावे और कोई नौकरी सरकार द्वारा नही दी जायेगी. बहुत पहले भी यह विभाग शिक्षा विभाग कहलाता था अब फिर कहा जाएगा. इसमें नया क्या है ?





Comment here