जनमित्रः पटना विश्वविद्यालय के छात्र संघ अध्यक्ष मनीष यादव को इसलिए जेल भेज दिया गया था क्योंकि उन्होंने लॉकडाउन के दौरान राज्य से बाहर फंसे छात्रों को अपने राज्य बिहार में बुलाने की मांग राज्य सरकार से की थी. दुर्भाग्य की सरकार ने उस समय छात्रों की बात नहीं सुनी बल्कि उल्टे छात्र नेताओं को ही सलाखों के अंदर भेज दिया जबकि बाद में
विपक्ष की दबाव पड़ने पर उसी सरकार ने छात्रों को अपने राज्य आने की अनुमति भी दी थी परंतु इस आंदोलन की शुरुआत करने वाले छात्र नेता मनीष एवं उनके साथी अभी भी जेल में है. जिसको लेकर के छात्रों ने सोशल मीडिया पर मुहिम चलाकर मनीष को रिहा करने की मांग की है.
महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय बक्सर के छात्रसंघ अध्यक्ष रवि यादव ने कहा कि सरकार छात्रों के आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रही है साथ ही उन्होंने कहा कि अगर सरकार मनीष को रिहा नहीं करती है तो छात्र सड़कों पर उतर कर आंदोलन करने को बाध्य होंगे जिसकी जिम्मेवार राज्य

सरकार होगी. वही छात्र संघ सचिव विश्वकर्मा यादव उर्फ बिट्टू ने कहा कि इससे शर्मनाक क्या होगा कि जो छात्रों के हित की बात करते हैं सरकार उन्हें ही प्रताड़ित करती है. इस मुहिम में डुमरांव अनुमंडल के छात्र नेता जितू यादव ने भी सोशल मीडिया से मुहिम चलाकर सरकार को इस मुद्दे पर संज्ञान लेने की अपील की है.
क्या था पूरा मामला
राजस्थान के कोटा में लॉकडाउन की वजह से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, असम, बिहार समेत कई प्रदेशों के बच्चे फंस गए थे. यह बच्चे यहां कोचिंग करते थे. बिहार को छोड़कर बाकी सभी प्रदेशों ने अपने बच्चों को वापस बुला लिया था, लेकिन बिहार की नीतीश सरकार ने बच्चों को वापस न बुलाने का फैसला किया. इसको लेकर के छात्र संघ के नेता मनीष यादव, लवकुश यादव, आदित्य मिश्रा आदि ने

विश्वविद्यालय के गेट पर धरना दिया था. छात्र नेताओं का कहना था कि वे लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए एक दूसरे से दूरी बना कर धरना दिया था. इसके बावजूद भी पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया इस दौरान पुलिस और छात्रों के बीच जमकर झड़प भी हुई थी.





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