जनमित्र- महात्मा गांधी जी की ये बातें अब प्रासंगिक हो चली है जो कभी उन्होंने अंग्रेज़ी शासन के ख़िलाफ़ कहीं थीं, आज के दौर में वही व्यवस्था लोकतंत्र का लबादा ओढ़े हमारे सामने आ खड़ी हुई हैं, चाहे आपके तर्क कितने भी सटीक हों बेहूदे आदेश आईपीसी 188 की खाल में आपकी पीठ पर लाद दिए जाएँगे, चाहे उनमे ज़रा भी आधार हो या न हो, इसी प्रकार से एक क़ानून अंग्रेजो ने लागु किया था नमक बनाने पर रोक का तो बापू ने दांडी यात्रा करके और नमक बनाकर उस काले क़ानून को तोड़ा था, आज प्रशासन और सरकार द्वारा रोज़ नए तर्कहीन आदेश लागू किए जा रहे हैं और व्यवसाय करने के हमारे मौलिक अधिकार जो संविधान की धारा अनुच्छेद 19

(G) से हमें मिला है उससे वंचित कर रहे हैं, जानकारी मिली की कुछ फुटपाथी दुकानदारो को कल पकड़ कर पता नहीं क्यूँ प्रशासन द्वारा दिन भर थाने में भी बैठा कर रखा गया था, विभिन्न सोशल मीडिया के प्लेटफ़ार्म के ज़रिए और ई मेल के माध्यम से प्रशासन और सरकार तक मैं अपनी बात मज़बूत तर्कों के साथ पुरी दृढ़ता से पहुँचा रहा हूँ, लेकिन इनके कानो पर जूँ रेंगना तो दूर ये एक जवाब तक देना उचित नहीं समझते, ऐसा लगता है इनकी नज़र में हमारी औक़ात अब कीड़े मकोड़ों से अधिक की नहीं है, अतः सत्य के आग्रह हेतु मंगलवार से मैं सत्याग्रह की शुरुआत करने जा रहा हूँ, यदि कल सोमवार तक फल, सब्ज़ी, मीट, मछली, अंडा दुकानो पर

जारी किया गया बेतुका आदेश वापिस नहीं लिया गया तो इस आदेश को तोड़ते हुए मंगलवार दिनांक सुबह दस बजे स्थानीय अनुमंडल अधिकारी बक्सर कार्यालय के समक्ष मैं स्वयं हाथ ठेला लेकर सब्ज़ी बेचने जाऊँगा और इस सरकारी आदेश का उल्लंघन करूँगा, गिरफ़्तारी होने पर जेल में ही आदेश वापिस होने तक आमरण अनशन पर रहूँगा ।
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,
देखना है ज़ोर कितना बाज़ुए क़ातिल में है।

Prashashan hai bhaiya but you are right