द जनमित्र | शशि
पटना-बक्सर एनएच 922 के पश्चिमी सिरे यानी बक्सर जिला मुख्यालय के गोलंबर पर जाम की पुरानी मुसीबत इस साल के अंत तक कुछ राहत पा सकती है। वजह है बक्सर को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाला लिंक हाईवे, जिसका निर्माण अब रफ्तार पकड़ चुका है। उम्मीद है कि 2025 के आखिर तक यह बनकर तैयार हो जाएगा। अभी तो बक्सर से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे की ओर जाने वाली सड़क एक संकरी इंटरमीडिएट लेन है, जो पटना-बक्सर फोरलेन से आने वाले ट्रैफिक का बोझ संभाल नहीं पाती।




नया हाईवे बनने से बक्सर और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के बीच वाहनों की आवाजाही थोड़ी आसान हो जाएगी। मगर एक पेंच अभी भी है—बक्सर में गंगा नदी पर बना दो लेन का पुल। यह ट्रैफिक के लिए अड़चन बन सकता है। यहां तीन लेन का दूसरा पुल प्रस्तावित है, लेकिन उसकी नींव भी अभी नहीं रखी गई है।
दूसरी तरफ, उत्तर प्रदेश में एनएच-31 के गाजीपुर-बलिया-रिविलगंज खंड पर फोरलेन राजमार्ग का काम जोरों पर है। इसी बड़ी योजना का हिस्सा है करीमुद्दीनपुर से बक्सर के भरौली तक 17.270 किलोमीटर लंबा फोरलेन हाईवे। यह नया रास्ता भरौली गोलंबर से सीधे उत्तर की ओर निकलेगा। इससे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के बड़े शहरों से बक्सर और पटना की दूरी 16-17 किलोमीटर तक कम हो जाएगी। इंटरमीडिएट लेन की जगह फोरलेन बनने से समय की बचत तो होगी ही, रास्ता भी सुगम हो जाएगा।
इस 17.270 किलोमीटर लंबे बक्सर स्पर की कुल लागत 617.88 करोड़ रुपये है, जिसमें से 316.56 करोड़ रुपये पहले ही मंजूर हो चुके हैं। काम 1 जून, 2023 को शुरू हुआ था और 14 जून, 2025 तक पूरा होने का लक्ष्य था। मगर तय समय पर काम पूरा होता नहीं दिख रहा। हाल ही में एनएचएआई के परियोजना निदेशक एसपी पाठक ने कहा था कि अक्टूबर 2025 तक यह बनकर तैयार हो जाएगा। उनके दावे के बाद निर्माण में तेजी तो आई है, लेकिन देखना यह है कि यह वादा कितना सच साबित होता है।

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