द जनमित्र | शशि
बक्सर पावर हाउस के फ्यूज कॉल सेंटर परिसर में साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के कर्मचारियों ने बिहार स्टेट प्रोग्रेसिव इलेक्ट्रिक वर्क्स यूनियन के बैनर तले एक जोरदार बैठक की, जिसमें उनकी लंबित मांगों ने आग की तरह भड़क दिखाई। वेतन में बढ़ोतरी, सेवा अवधि को 60 साल तक बढ़ाने, एजेंसी प्रथा को जड़ से उखाड़कर स्थायी नियुक्ति, बेहतर जीवन बीमा और ओवरटाइम भुगतान में सुधार जैसी मांगों पर कर्मचारी अड़े हुए हैं। उनका साफ कहना है कि अगर 26 जून 2025 तक मांगें नहीं मानी गईं, तो अनिश्चितकालीन हड़ताल होगी, जिसका बिजली आपूर्ति पर ऐसा झटका लगेगा कि व्यवस्था हिल जाएगी।




यूनियन ने बैठक में खुलासा किया कि 30 दिन की मेहनत के बाद भी कर्मचारियों को सिर्फ 26 दिन का वेतन थमाया जाता है—यह अन्याय नहीं तो और क्या है? एजेंसी सिस्टम ने स्थायी नौकरी का रास्ता बंद कर कर्मचारियों के भविष्य को अंधेरे में धकेल दिया है। बेहतर वेतन और सुविधाओं के लिए कंपनी के कर्मचारी एकजुट होकर ललकार रहे हैं।
बैठक में बीरेन्द्र प्रसाद, राम आशीष यादव, प्रगति वर्मा, भरत अवतार सैनी, राम प्रवेश निषाद, तुलसी चौधरी, शीतल, निर्मल, राम प्रवेश चौधरी, बिरन, दिनेश कुमार, मनोज कुमार जैसे कर्मचारी शामिल थे। सबने एक स्वर में कहा, “जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, हम चुप नहीं बैठेंगे।” कंपनी और प्रशासन से फौरन समाधान की उम्मीद है।
साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। क्षेत्रीय अधिकारी अगर जल्द कोई हल नहीं निकालते, तो बिजली आपूर्ति में रुकावट और उपभोक्ताओं की परेशानी तय है।

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