द जनमित्र। विमल यादव। 9431092766
पटना: बिहार विधानसभा बजट सत्र के तीसरे दिन भाकपा-माले से डुमराँव डॉ० अजीत कुमार सिंह ने विधानसभा के ‘शून्यकाल’ सत्र के दौरान सातवें चरण के शिक्षक बहाली का मामला उठाया. डुमराँव विधायक ने राज्य के प्राथमिक, माध्यमिक तथा उच्च माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को दूर करने तथा टीईटी, बीटीईटी एवं सीटीईटी पास अभ्यर्थियों के भविष्य को देखते हुए अविलम्ब सातवें चरण के शिक्षक बहाली की नोटिफिकेशन जारी कर बहाली की प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण कराने की मांग की है.

विधायक ने कहा कि पिछले तीन वर्षों से बहाली की मांग को लेकर बीटीईटी-सीटीईटी पास अभ्यर्थी आंदोलन कर रहे हैं. हमेशा उन्हें शिक्षा विभाग के तरफ़ से सिर्फ़ आश्वासन ही मिलता रहा है. अब बिहार में महागठबंधन की सरकार है . महागठबंधन की घोषणा पत्र में भी शिक्षक बहाली का मामला अंकित था . विभाग के उदासीन रवैये के कारण शिक्षक अभ्यर्थियों में काफ़ी रोष है. सरकार को समझना होगा कि छात्र महागठबंधन सरकार का विरोध नहीं कर रहे हैं लेकिन अपने हक़ का रोज़गार मांग रहे हैं जिसका वादा किया गया था

बजट पर विधायक ने कहा कि बिहार सरकार द्वारा पेश किए गए बजट में 2020 के विधानसभा चुनाव के समय महागठबंधन के घोषणापत्र में जनता से किए गए वादों व संकल्पों को समावेशित करना चाहिए था . सरकार के समक्ष अब भी कई चुनौतियां हैं और उसे किसी भी प्रकार की खुशफहमी से बचना चाहिए, ताकि भाजपा जैसी फासीवादी ताकतों को कोई मौका न मिल सके. सरकार ने बीपीएससी / एसएससी आदि विभागों में पद सृजन की घोषणा की है. यह अच्छा कदम है, लेकिन विश्वविद्यालयों और प्लस टू विद्यालयों में कार्यरत अतिथि शिक्षकों के समायोजन, लंबित शिक्षक बहाली को अविलंब शुरू करने, बहाली की प्रक्रिया को

पारदर्शी व सुगम बनाने तथा विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक माहौल को ठीक करने व सत्र के नियमितीकरण, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के साथ-साथ संबद्ध महाविद्यालयों में दशकों से कार्यरत शिक्षक व शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को अतिथि शिक्षक को मिलने वाली न्यूनतम राशि देने आदि सवालों को समावेशित नहीं किया गया है . शिक्षा विभाग के तहत जारी स्कीमों में कार्यरत कर्मियों को सम्मानजनक वेतन व नियमितीकरण और साथ ही, शिक्षा विभाग में बरसों तक अपनी सेवा देने वाले हजारों शिक्षा प्रेरकों की पुनबर्हाली होनी चाहिए थी .

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