द जनमित्र | शशि
बक्सर के नगर भवन में पूर्व सांसद स्वर्गीय लालमुनि चौबे की श्रद्धांजलि सभा का आयोजन एक भावपूर्ण और गरिमामय अवसर के रूप में संपन्न हुआ। इस सभा में देश के दो प्रमुख संवैधानिक पदाधिकारियों, बिहार के राज्यपाल मोहम्मद आरिफ खान और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने हिस्सा लिया, जिससे इस आयोजन की महत्ता और भी बढ़ गई। यह सभा न केवल लालमुनि चौबे के योगदान को याद करने का एक मंच थी, बल्कि उनके विचारों और आदर्शों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का भी एक प्रयास था।


जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने अपने संबोधन में लालमुनि चौबे को भारतीय राजनीति का ‘योगिराज’ करार देते हुए उनकी असाधारण सोच और कार्यशैली की सराहना की। उन्होंने कहा कि चौबे ने राजनीति को कभी भी सत्ता हासिल करने का साधन नहीं माना, बल्कि इसे राष्ट्र निर्माण और समाज सेवा का एक प्रभावी माध्यम माना। सिन्हा ने उनके जीवन के कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि लालमुनि चौबे बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से ‘हिंदू’ शब्द हटाए जाने के प्रस्ताव के खिलाफ हुए आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल रहे थे। यह घटना उनकी सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति गहरी निष्ठा को दर्शाती है। इसके अलावा, गंगा स्नान उनकी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा था, जो उनकी आध्यात्मिकता और भारतीय परंपराओं के प्रति उनके लगाव को उजागर करता है।
वहीं, बिहार के राज्यपाल मोहम्मद आरिफ खान ने लालमुनि चौबे को भारतीय संस्कृति और परंपराओं का सच्चा प्रतिनिधि बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवन में त्याग और सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। राज्यपाल ने उनके सामाजिक सुधारों के प्रति समर्पण को रेखांकित करते हुए कहा कि चौबे समाज में समानता और न्याय की स्थापना के लिए हमेशा प्रयासरत रहे। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि लालमुनि चौबे का व्यक्तित्व इतना विशाल और समावेशी था कि उनके दरबार में हर विचारधारा के लोग सम्मान और स्वागत पाते थे। राज्यपाल ने उन्हें बिहार की एक सशक्त आवाज बताया, जिसने संसद में लंबे समय तक समाज की विभिन्न समस्याओं को उठाया और जनता के हित में अथक कार्य किया। उनके जीवन को संघर्ष, आदर्श और समर्पण की एक प्रेरक मिसाल के रूप में प्रस्तुत करते हुए राज्यपाल ने श्रोताओं को उनके दिखाए मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।
लालमुनि चौबे के राजनीतिक योगदान पर चर्चा करते हुए यह भी बताया गया कि उन्होंने लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक का पुरजोर समर्थन किया था। 23 दिसंबर 2005 को इस विधेयक पर हुई चर्चा के दौरान उन्होंने अपने विचार रखते हुए कहा था कि समाजवाद को एक परिवार की तरह होना चाहिए, जहां सभी को समान अधिकार और सम्मान प्राप्त हो। इस बयान से उनकी समतावादी सोच और समाज के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता झलकती है। इस श्रद्धांजलि सभा का संयोजन उनके पुत्र शिशिर चौबे ने किया, जिन्होंने अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
श्रद्धांजलि सभा में राज्यपाल और उपराज्यपाल के अलावा कई अन्य प्रमुख हस्तियां भी शामिल हुईं। इनमें सभा अध्यक्ष झूलन दुबे, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर दिलीप जायसवाल और पूर्व मंत्री संतोष कुमार निराला जैसे गणमान्य लोग उपस्थित थे। इन सभी ने लालमुनि चौबे के साथ अपने व्यक्तिगत और राजनीतिक अनुभवों को साझा करते हुए उनके कार्यों की प्रशंसा की। सभा में मौजूद लोगों ने स्वर्गीय चौबे को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
अंत में, राज्यपाल मोहम्मद आरिफ खान ने अपने संबोधन को समाप्त करते हुए कहा, “आज हम सभी लालमुनि चौबे को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए यह संकल्प लें कि उनके बताए मार्ग पर चलें। साथ ही, समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए निरंतर कार्य करें।”

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