द जनमित्र | शशि
बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान डुमराँव विधायक डॉ. अजीत कुमार सिंह ने राज्य सरकार पर बिजली बिल वसूली में दोहरे मापदंड अपनाने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने विधानसभा में तारांकित प्रश्न के जरिए ऊर्जा मंत्री से जवाब मांगा और डुमराँव टेक्सटाइल लिमिटेड (सुता मिल) के मामले को जोरदार तरीके से उठाया। विधायक ने बताया कि इस कंपनी पर साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड का 2 करोड़ 65 लाख 13 हज़ार 742 रुपये का बकाया लंबे समय से बकाया है। इसके बावजूद न तो इस राशि की वसूली के लिए कोई ठोस कदम उठाया गया है और न ही कंपनी के निदेशकों के बिजली कनेक्शन काटे गए हैं।


डॉ. अजीत कुमार सिंह ने सदन में इस मुद्दे को विस्तार से रखते हुए कहा कि डुमराँव टेक्सटाइल मिल के निदेशकों में डुमराँव राज परिवार के प्रमुख सदस्य कमल सिंह और चन्द्रविजय सिंह के अलावा पवन कुमार पटवारी, जयशंकर मिश्रा, विश्वभर लाल पटवारी और रोहित पटवारी शामिल हैं। इन लोगों पर वर्षों से बकाया राशि जमा है, लेकिन सरकार और बिजली कंपनियों की ओर से कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई। विधायक ने इसे सरकार की निष्क्रियता और प्रभावशाली लोगों के प्रति नरम रवैये का उदाहरण करार दिया।
उन्होंने सरकार के जवाब पर भी सवाल उठाया। विधायक के अनुसार, उनके प्रश्न के जवाब में सरकार ने कहा कि नीलामवाद केस संख्या 24/2014-15 के तहत वसूली की प्रक्रिया चल रही है और हाल ही में एक बार फिर से नोटिस जारी किया गया है। लेकिन डॉ. सिंह ने तंज कसते हुए कहा कि यह जवाब नया नहीं है। साल 2022 में भी सरकार ने यही तर्क दिया था, लेकिन तीन साल बाद भी नतीजा शून्य है। उन्होंने पूछा कि आखिर इतने लंबे समय तक वसूली क्यों नहीं हो पाई और प्रभावशाली लोगों को राहत देने की यह नीति कब तक चलेगी?
इसके विपरीत, विधायक ने आम जनता के साथ हो रहे व्यवहार पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गरीब उपभोक्ताओं के बिजली बिल में थोड़ी भी देरी होने पर बिजली कंपनियां तुरंत उनके कनेक्शन काट देती हैं। बकाया राशि चाहे छोटी हो या बड़ी, गरीबों के प्रति कोई सहानुभूति नहीं दिखाई जाती। लेकिन जब बात बड़े बकायेदारों की आती है, तो कार्रवाई के नाम पर केवल कागजी खानापूरी की जाती है। विधायक ने इसे सरकार की गरीब विरोधी मानसिकता का सबूत बताया।
डॉ. अजीत कुमार सिंह ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बिहार में बिजली बिल वसूली के मामले में स्पष्ट भेदभाव देखने को मिल रहा है। जहां गरीब उपभोक्ताओं को सख्ती का सामना करना पड़ता है, वहीं रसूखदार लोगों के लिए नियमों में ढील दी जाती है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर डुमराँव टेक्सटाइल मिल के निदेशकों के बिजली कनेक्शन काटने में इतनी देरी क्यों हो रही है? क्या यह इसलिए है कि वे प्रभावशाली लोग हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई करने की हिम्मत सरकार में नहीं है? उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि अगर इस बाबत कार्रवाई नहीं हुई, तो जनता इसका जवाब आने वाले चुनावों में देगी।
डुमरांव विधायक ने सरकार से मांग की कि बिजली बिल वसूली में एक समान नीति अपनाई जाए। उन्होंने कहा कि अगर गरीबों से सख्ती की जा सकती है, तो बड़े बकायेदारों के खिलाफ भी वैसी ही कार्रवाई होनी चाहिए। डुमराँव टेक्सटाइल मिल जैसे मामलों में तुरंत कनेक्शन काटने और वसूली की प्रक्रिया को तेज करने की जरूरत है, ताकि यह संदेश जाए कि कानून सबके लिए बराबर है।

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