द जनमित्र | शशि
सोमवार को स्थानीय रेलवे स्टेशन पर टिकट निरीक्षकों की एक खास टीम ने टिकट चेकिंग का जो अभियान चलाया, वो कमाल का ड्रामा बन गया। वैध टिकट जेब में लिए यात्रियों को भी न सिर्फ जुर्माना ठोंक दिया गया, बल्कि ऊपर से दुर्व्यवहार की मार भी झेलनी पड़ी। गुस्साए यात्रियों का कहना था कि टिकट दिखाने के बाद भी टीटीई ने बहाने बनाकर न सिर्फ फाइन वसूला, बल्कि बदतमीजी का डोज भी दे डाला। महिलाओं तक को नहीं छोड़ा गया, जिससे स्टेशन पर हंगामा मच गया।




खबर है कि ये खास टीम दानापुर से बक्सर पहुंची थी। अपना काम निपटाते ही तुरंत वापस लौट गई, तो जिन टीटीई पर इल्जाम लगे, उनका पक्ष अभी सुनने को नहीं मिला। लेकिन जिन यात्रियों की जेब ढीली हुई, उन्होंने अपनी कहानियां सुनाईं कि कैसे उन्हें बेवजह तंग किया गया। मिसाल के तौर पर, बक्सर के आदित्य केसरी ने बताया कि बहन की शादी के लिए वह पत्नी के साथ पटना जा रहा था। प्लेटफॉर्म पर सामान रखते वक्त टीटीई ने उसे धर लिया। उसने कहा कि पत्नी टिकट लेकर आ रही है, मगर टीटीई ने कान ही नहीं दिए—गालियां बरसाईं, टिकट दिखाने पर भी नहीं छोड़ा और बदसलूकी का सिलसिला जारी रखा।

एक दूसरी घटना में, दिलदारनगर से फतुहा जा रहे देवानंद सिंह ने बताया कि ट्रेन रुकते ही वह पानी पीने उतरा था। तभी टीटीई ने उसे पकड़ लिया। टिकट होने की बात कही तो जवाब मिला, “आप एसी बोगी में सफर कर रहे थे,” और जबरन जुर्माना वसूल लिया। उधर, सिविल लाइंस बक्सर के गायक गुड्डू पाठक का कहना था कि पत्नी को छोड़ने के लिए उसने प्लेटफॉर्म टिकट लिया था, फिर भी 900 रुपये का फाइन ठोंक दिया गया। गुड्डू ने ये भी इल्जाम लगाया कि कुछ लोग 200-300 रुपये देकर बिना रसीद छूट गए, जबकि टिकट वालों से मोटी रकम वसूली गई।
स्टेशन पर टीटीई की इस मनमानी से नाराज यात्रियों ने हंगामा खड़ा कर दिया। लोगों ने रेलवे प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि सच सामने आए और ऐसी हरकतों पर लगाम लगे।

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