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अलमेंडाजोल और फाइलेरिया की दवा खाने से तीन दर्जन से अधिक स्कूली बच्चे बीमार

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अलमेंडाजोल और फाइलेरिया की दवा खाते ही चिलबिला मध्य विद्यालय इटाढ़ी के 40 बच्चे हुए बीमार. स्कूल प्रशासन से लेकर जिला प्रशासन में मचा हड़कम्प. अलग अलग नजदीकी अस्पताल में चल रहा है इलाज. एक ही बेड पर 5-5 बच्चो का किया जा रहा है इलाज.

द जनमित्र | सरिता कुमारी

बक्सर: जिले के चिलबिला मध्य विद्यालय इटाढ़ी स्कूल के एक के बाद एक 40 बच्चे बीमार हो गए. देखते ही देखते सभी बच्चे दस्त करने के साथ ही मूर्छित अवस्था में पहुँच गए और उनकी बोलचाल बन्द हो गई. जिसके बाद स्कूल प्रशासन में हड़कम्प मच गया. आननफानन में ग्रामीणों की मदद से सभी बच्चों को अलग अलग नजदीकी अस्पताल में पहुचाया गया. जहाँ बेड़ कम होने के कारण एक-एक बेड पर पांच-पांच बच्चों का इलाज किया जा रहा है. इतने संख्या में स्कूली बच्चों की तबियत बिगड़ने की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन से लेकर शिक्षा विभाग में हड़कम्प मच गया है. गम्भीर बच्चो को लगातार सदर अस्पताल में भर्ती कराकर इलाज किया जा रहा है.

दवा खिलाकर निकल गए स्वास्थ्यकर्मी

स्थानीय लोगों ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के कर्मी और आशा कार्यकर्ता चिलबिला मध्य विद्यालय इटाढ़ी में पहुँचकर, एक साथ फाइलेरिया और अलमेंडा जोल का दवा स्कूली बच्चों को पिलाकर निकल गए. जिसके बाद बच्चे दस्त कर चक्कर खाकर जमीन पर गिरने लगे. सूचना देने के बाद भी आशा कार्यकर्ता स्कूल में बच्चो को देखने के लिए नही आई. जब बच्चों की बोलचाल बन्द होने लगी तो हमलोग गम्भीर हालात में 12 बच्चो को बक्सर सदर अस्पताल में लेकर आये और अन्य बच्चो को वही इटाढ़ी पीएचसी में भर्ती करा दिए जंहा उनका इलाज चल रहा है.

क्या कहते है शिक्षक

वही स्कूल के शिक्षकों ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के द्वारा आई हुई टीम बच्चों को अलमेंडा जोल और फाइलेरिया की दवा पिलाकर बिना प्रतीक्षा किए ही स्कूल से निकल गई. कुछ ही देर बाद बच्चो के सर एवं पेट में दर्द शुरू हो गया और बच्चे दस्त करने लगे. ग्रामीणों के सहयोग से हमलोग उनको अस्पताल में भर्ती कराये है, जंहा उनका इलाज चल रहा है. जिले के सबसे बड़े सदर अस्पताल में बेड के अभाव में एक बेड पर पांच-पांच बच्चों को लिटाकर इलाज किया जा रहा है.

वही जिला रोगी कल्याण समिति के सदस्य डॉक्टर मनोज यादव ने स्वास्थ्य विभाग पर ही सवालिया निशान उठाते हुए कहा कि, जब भी किसी बड़े अभियान की शुरुआत होती है तो उसमें दक्ष और प्रशिक्षित लोगों को लगाया जाता है. लेकिन जिनको दावा का नाम पढ़ने तक नहीं आ रहा है वैसे लोग क्यो घूम घूम कर बच्चों को दवा पिला रहे हैं. इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच हो, और जो लोग भी दोषी हैं उन पर कार्रवाई हो. साथ ही जिले के जो सबसे ट्रेंड लोग हैं वहीं सरकार के इस अभियान को आगे बढ़ाएं. क्योंकि बच्चे देश का भविष्य है और उनके साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

गौरतलब है कि सदर अस्पताल में पहुँचे बच्चो का इलाज कर रहे सदर अस्पताल के डॉक्टर योगेंद्र प्रसाद ने बताया कि बच्चे फिलहाल खतरे से बाहर है. जिनका इलाज किया जा रहा है. अभी तक सदर अस्पताल में आने वाले बच्चों की संख्या 12 है.

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