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बक्सर में गंगा का उफान: बाढ़ का खतरा, सेल्फी का जुनून

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द जनमित्र | शशि

गंगा नदी का रौद्र रूप बक्सर में थम सा गया है, मगर खतरे का साया अभी भी मंडरा रहा है। जलस्तर खतरे के निशान से बस 52 सेंटीमीटर नीचे स्थिर हुआ है, जिससे प्रशासन और तटवर्ती बाशिंदों ने राहत की सांस तो ली, पर बाढ़ का डर अभी टला नहीं। गंगा की सहायक नदियां भी उफान पर हैं, जिससे हालात चिंताजनक बने हुए हैं।

केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक, सोमवार को गंगा का जलस्तर 59.80 मीटर पर रिकॉर्ड हुआ। बीते 48 घंटों में पानी तेजी से बढ़ा, जिसने कर्मनाशा नदी को भी उग्र कर दिया। बनारपुर गांव के वार्ड नंबर 9 में पानी घुस गया, जहां दर्जनभर घर डूब गए। दियारा क्षेत्र में गंगा का पानी कोईलवर तटबंध तक पहुंच चुका है, जिससे खतरा और गहरा गया। बक्सर-बलिया को जोड़ने वाला ज्ञानेश्वर मिश्र पुल का संपर्क टूट गया, और लोग जान जोखिम में डालकर वैकल्पिक रास्तों से सफर कर रहे हैं।

प्रशासन ने नाव संचालन पर रोक लगा दी है और घाटों पर स्नान करने वालों से सावधानी बरतने को कहा है। रामरेखा घाट, नाथ बाबा घाट जैसे प्रमुख स्थानों पर सन्नाटा पसरा है, क्योंकि कई घाटों का संपर्क टूट चुका है। लोग अब लंबे सड़क मार्गों से आवागमन को मजबूर हैं।

बाढ़ ने किसानों की कमर तोड़ दी। गंगा के कछारी इलाकों में सब्जियों की फसलें पानी में डूब गईं। चौसा, सिमरी, बक्सर, ब्रह्मपुर और चक्की प्रखंड के निचले इलाकों में पानी तेजी से फैल रहा है, जिससे किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

विपदा के बीच कुछ युवा इसे मौज-मस्ती का मौका बना रहे हैं। रामरेखा और नाथ बाबा घाट पर सेल्फी लेने और जलस्तर देखने वालों की भीड़ जुट रही है। प्रशासन ने सख्त चेतावनी दी है कि लोग ऐसे खतरनाक इलाकों से दूर रहें।

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