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किसानों की समस्याओं को लेकर जिलाधिकारी ने बनाई समन्वय समिति

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पिछले एक दशक से चौसा में निर्माणाधीन एसजेवीएन पावर प्लांट और किसानों के बीच उचित मुआवजे की मांग को लेकर चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के लिए जिलाधिकारी के निर्देश पर समन्वय समिति का हुआ गठन. 19 अक्टूबर को होने वाली बैठक से पहले किसानों की समस्याओं का हल निकालने के लिए जिला प्रशासन के अधिकारियो ने पावर प्लांट के कर्मीयो को दिया निर्देश.

द जनमित्र | सरिता कुमारी

बक्सर: 10 हजार करोड़ की लागत से चौसा में बनने वाले 1320 मेगावाट के निर्माणाधीन पावर प्लांट के अधिकारियों और किसानों के बीच पिछले एक दशक से भूमि की उचित मुआवजे की मांग को लेकर संघर्ष जारी है. अभी भी किसान लगातार आंदोलित है. किसानों का आरोप है कि 2011-12 में पावर प्लांट के लिए कम्पनी ने जो जमीन हायर की थी. उसी रेट में 2021-22 में रेल कॉरिडोर और वाटर पाइप लाइन के लिए किसानों से जबरजस्ती जमीन ले रही है. जबकि किसान वर्तमान रेट से जमीन की मुआवजे की मांग को लेकर लागातार आंदोलन कर रहे है.

किसानों की समस्याओं को दूर करने के लिए जिलाधिकारी ने बनाई समन्वय समिति

किसानों के इस समस्या के निदान के लिए जिलाधिकारी अंशुल अग्रवाल के निर्देश पर उप-समाहर्ता प्रमोद कुमार एवं एसडीएम धीरेंद्र मिश्रा के नेतृत्व में समन्वय समिति का गठन किया गया है. इस समन्वय समिति के उप-समाहर्ता अध्यक्ष है, जबकि एसडीएम के अलावे प्रभावित किसान और कम्पनी के कर्मी इस समिति के सदस्य है. जिनके बीच पहले दौर का बैठक हो चुका है और अगली बैठक 19 अक्टूबर को होनी है. किसानों को उम्मीद है कि अब उनकी समस्या का समाधान हो जाएगा.

किसानों का आरोप

चौसा के किसानों का आरोप है कि, जब कंपनी के द्वारा जमीन हायर किया जा रहा था. उसी समय वहां के किसानों को कई तरह की लालच दी गई थी. शुरुआती दौर में कहा गया था की इस कंपनी में स्थानीय लोगो को खासकर जिनके जमीन कम्पनी ले रही है उनके घर के सदस्यों को नौकरी में वरीयता देगी. फ्री में उन किसानों को बिजली मिलेगी और कम्पनी से निकलने वाले प्रदूषण से उनका स्वास्थ्य खराब न हो, उसके लिए कम्पनी के अंदर से लेकर चारो तरफ 10 लाख वृक्ष लगाए जाएंगे. हाईटेक अस्पताल, मॉडल स्कूल, पार्क, स्टेडियम का निर्माण कराया जाएगा. किसानों को उनके जमीन का उचित मुआवजा दीया जाएगा. लेकिन जमीन देने के बाद कम्पनी ने अपना एक भी वादा नही निभाया और उचित मुआवजे की मांग को लेकर आज भी अपना काम छोड़कर किसान धरना दे रहे है और आंदोलन कर रहे है.

समन्वय समिति के माध्यम से निकलेगा हल

किसानों के साथ हुए इस छलावे का निराकरण करने के लिए जिलाधिकारी द्वारा बनाई गई समन्वय समिति पर किसानों को भरोसा है. चौसा के किसानों ने बताया कि जिस तरफ से पहले दौर का बैठक सार्थक हुआ है, उससे किसानों में उम्मीद जगी है कि उनके समस्याओं का निदान निकल जाएगा. जिसका झलक 19 अक्टूबर को होने वाली दूसरी बैठक में देखने को भी मिलेगा.

वही इस समिति के अध्यक्ष उपसमाहर्ता प्रमोद कुमार और सदस्य सदर एसडीएम धीरेंद्र मिश्रा ने बताया कि, किसानों के हर समस्याओं का निदान निकाला जाएगा. 19 तारीख से पहले कंपनी के कर्मियों को यह निर्देश दिया गया है, कि किसानों के जो भी डिमांड है उसे पर पूरी जानकारी लेकर अगले बैठक में आए, और जो किसानों की शिकायत है उसे दूर करें. वहीं एसडीएम धीरेंद्र मिश्रा ने बताया कि कंपनी ने शुरुआती दौर में जो भी वादे किसानों से किये हैं, चाहे वह मुआवजे की हो या स्वास्थ्य, शिक्षा, वृक्षारोपण, खेल मैदान या पार्क का सभी बिंदुओं पर वार्ता हो रही है. समन्वय समिति का उद्देश्य ही है कि किसान जिला प्रशासन के अधिकारियो के सामने बिना किसी बिचौलिए के कम्पनी के कर्मीयो से सीधे बात कर सके.

गौरतलब है कि 2023 में ही चौसा पावर प्लांट का 660 मेगावाट का एक यूनिट चालू होना था. लेकिन जनवरी माह में अपनी मांग को लेकर आए किसानों पर पुलिस ने जिस तरह से लाठी चार्ज किए और उसी विरोध में किसानों ने जिस तरह से पावर प्लांट में आग लगा दी थी उससे कम्पनी का काम प्रभावित हुआ. अब पावर प्लांट के अंदर काम कर रहे मजदूरों का भी आरोप है कि कम्पनी के कर्मी अंग्रेजो से भी बद्तर दुर्ब्यवहार कर रहे है.

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