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त्योहारों के मौसम में तेज हुई रांची-बक्सर सीधी ट्रेन की मांग

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द जनमित्र | शशि

झारखंड की राजधानी रांची से बिहार के बक्सर तक सीधी ट्रेन सेवा शुरू करने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ रही है। त्योहारों का सीजन नजदीक आने के साथ ही हजारों प्रवासी यात्री और स्थानीय संगठन इस पुरानी मांग को लेकर सक्रिय हो गए हैं। जनप्रतिनिधियों ने भी रेलवे मंत्रालय से इस पर तत्काल ध्यान देने की अपील की है, ताकि यात्रियों की परेशानी दूर हो सके और रेलवे को अतिरिक्त राजस्व मिले।

यात्रियों का कहना है कि रांची से बक्सर तक कोई डायरेक्ट ट्रेन नहीं होने से उन्हें या तो पटना और आरा होकर लंबा रास्ता तय करना पड़ता है या बसों का सहारा लेना पड़ता है। इससे न केवल समय बर्बाद होता है बल्कि अतिरिक्त खर्च भी बढ़ जाता है। रेलयात्री कल्याण समिति के एक सदस्य ने बताया, “यह मांग कई सालों से लंबित है। हमने कई बार आवाज उठाई, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। त्योहारों में घर लौटने वाले लाखों प्रवासियों के लिए यह ट्रेन जीवनरेखा साबित हो सकती है।”

बक्सर रेलवे स्टेशन पूर्व मध्य रेलवे का एक महत्वपूर्ण जंक्शन है, जहां से हर साल लाखों यात्री सफर करते हैं। आंकड़ों के मुताबिक, केवल पिछले डेढ़ साल में यहां से 15 करोड़ रुपये से ज्यादा की अनारक्षित टिकट बिक्री दर्ज की गई है, जो यात्रियों की भारी भीड़ को दर्शाता है। इसके बावजूद रांची से बक्सर के बीच सीधी कनेक्टिविटी का अभाव है। यात्री इस ट्रेन को बोकारो, धनबाद, कोडरमा, पहाड़पुर, तिलैया और पटना के रूट से चलाने की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि किऊल रूट पर पहले से ही ट्रेनों का दबाव ज्यादा है, इसलिए इस वैकल्पिक मार्ग से न केवल यात्रा सुगम होगी बल्कि अन्य स्टेशनों को भी फायदा पहुंचेगा।

स्थानीय सांसद और विधायकों ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि रांची, बोकारो और धनबाद जैसे औद्योगिक शहरों से बक्सर की तरफ जाने वाले प्रवासियों की संख्या त्योहारों में कई गुना बढ़ जाती है। एक जनप्रतिनिधि ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “यह ट्रेन शुरू होने से तीनों प्रमुख स्टेशनों को बक्सर से सीधा जुड़ाव मिलेगा। रेलवे को भी राजस्व में भारी बढ़ोतरी होगी, क्योंकि वर्तमान में यात्री बसों या अन्य माध्यमों का इस्तेमाल कर रहे हैं।”

सामाजिक संगठनों ने रेलवे मंत्रालय को पत्र लिखकर इस पर गंभीरता से विचार करने की मांग की है। यात्रियों का मानना है कि यदि समय रहते यह सेवा शुरू हो जाए, तो न केवल उनकी सुविधा बढ़ेगी बल्कि क्षेत्रीय विकास को भी बल मिलेगा। फिलहाल, रेलवे की ओर से इस मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि त्योहारों के सीजन को देखते हुए इस पर जल्द फैसला लिया जा सकता है।

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