मेरे सपनों की उड़ान आसमान तक है,मुझे बनानी अपनी पहचान आसमान तक है, मैं कैसे हार जाऊ और थक कर बैठा रहूँ, मेरे हौसलो कि बुलन्दी आसमान तक है. यह शायरी केंद्रीय कारा में सजा काट रहे दर्जनों कैदियो की कहानी को बयां करती है।
जनमित्र/बक्सर: कहा जाता है कि कोई इंसान जन्म से अपराधी नही होता है, बस एक पल में कुछ ऐसा होता है कि वह कानून तोड़कर अपने सपनो को चकनाचूर कर देता है. और उसकी पूरी जिंदगी एक अंधेरी काल कोठरी में कैद हो जाती है. ऐसे दर्जनों कैदी जो बक्सर के केंद्रीय कारा में बन्द है, जो हाथों में कलम पकड़ अब अपने सपनो को उड़ान देने में लगे हुए है.

जेल में कैद दर्जनों कैदी कर रहे है, मास कम्युनिकेशन, एवं न्यूट्रिशन की पढ़ाई
केंद्रीय कारा में कैद ऐसे सैकड़ो कैदी है, जिनके सपनो को एक नई उड़ान देने में जेल प्रशासन के अधिकारी जी जान से लगे हुए है. जिसका अंदाज़ा इस आंकड़े से ही लगाया जा सकता है. इस केंद्रीय कारा में बंद सज़ावार 125 एवं विचाराधीन 202 कैदी निरक्षर है. जिनको साक्षर बनाने के लिए सभी तरह का प्रयास जेल प्रशासन के द्वारा किया जा रहा है.
वर्ग 10 से नीचे सज़ावार 198 जबकि विचाराधीन 364 ऐसे कैदी है, जो शिक्षा ग्रहण कर रहे है.
मैट्रिक एवं इण्टर में सज़ावार 231 जबकी विचाराधीन 347 ऐसे कैदी है, जो अपनी पढ़ाई पूरी करने में लगे हुए है.
स्नातक में सज़ावार 69 जबकि विचाराधीन 143 कैदी नामांकन कराकर पढ़ाई कर रहे है.
पोस्ट ग्रेज्युएट में नामांकन कराकर पढ़ाई करने वाले केंद्रीय कारा में, सज़ावार कैदी की संख्या 7 है, जबकि विचाराधीन 21 कैदी है.
डिप्लोमा की पढ़ाई करने वाले सज़ावार 7 एवं विचाराधीन 15 ऐसे कैदी है, जो जेल प्रशासन के अधिकारियो के सहयोग से इग्नू, एवं एन.ओयू जैसे संस्थानों में नामांकन कराकर अपने सपनो को उड़ान देने में लगे हुए है.
क्या कहते है जेल के अधिकारी
हथियार की जगह हांथो में कलम ले, अपने सपनो को उड़ान देने में लगे, कैदियो को सहयोग करने में जुटे केंद्रीय कारा के अधीक्षक राजीव कुमार ने बताया कि, जेल को अब सुधार गृह में तब्दील कर दिया गया है. जंहा आने वाले कैदी, सजा पूरी करने के बाद सामान्य जिंदगी जी सके. उसके लिए स्वरोजगार के प्रशिक्षण के साथ ही साथ, शैक्षणिक योग्यता को बढ़ाने के लिए दूरस्थ शैक्षिणक संस्थानों में उनका नामांकन भी कराया जा रहा है. इस जेल में बंद कई ऐसे कैदी है जो पत्रकारिता की कोर्स कर अपनी जिंदगी को एक नयी मुकाम देने में लगे हुए है.
गौरतलब है की केंद्रीय कारा प्रशासन के द्वारा, कैदियो के मन के अंदर बदलाव लाने के साथ ही, उन्हें समाज के मुख्यधारा से जोड़ने के लिए, प्रयास की जा रहा है. जिससे कि सजा काटकर जब वह बाहर निकले तो सम्मान की जिंदगी जी सके.

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