ग्राउंड रिपोर्टस्थानीय

फूलों के साथ किसानों के चेहरे भी मुरझाने लगे.

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कोरोना की तीसरी लहर के दस्तक से मुरझा रहे मंडियों में फूल, लग्न की शुरुआत से पहले ही कैंसिल होने लगे ऑर्डर, फूल कारोबारी से लेकर फूलो की खेती करने वाले किसानो के सूखने लगे चेहरे.

जनमित्र/बक्सर: देश में एक बार फिर से कोरोना के मामले बढ़ने लगे हैं. जिसका असर लगभग सभी प्रदेश में दिखाई देने लगा है. देश की राजधानी दिल्ली से लेकर, बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान जैसे राज्य में बढ़ते कोरोना के मामले को देखते हुए नाइट कर्फ्यू लगाया जा रहा है. उसका समय बढ़ाया जा रहा है. इन सब के बीच अब वैसे लोगो की परेशानी बढ़ने लगी है, जिनको लंबे समय से इस बात का इंतजार था, कि नए साल में कोरोना के कारण बिगड़े हालात सुधरेंगे, जन जीवन पटरी पर लौटेगी, रोजी रोजगार की संभावनाए बढ़ेगी. लेकिन नए साल के पहले महीने में ही, ओमिक्रोम की दस्तक ने एक बार फिर लोगो की खुशियो और उम्मीदों पर ब्रेक लगा दिया है.

तीसरी लहर का फूल कारोबारियो पर दिख रहा है  ज्यादा असर

फूल कारोबारियों को 2022 से काफी उम्मीदें थी, क्योंकि 2021 में कोरोना की दूसरी लहर ने कारोबार को पूरी तरह से बर्बाद करके रख दिया था. उम्मीद थी कि अब जब यह लहर धीमी पड़ी है तो 2022 की शुरुआत नए साल और फिर खरमास खत्म होने के बाद अच्छे लगन के साथ होगी. लेकिन नए वेरिएंट के खतरे को देखते हुए, धार्मिक स्थलों में पूजा पाठ करने पर सरकार ने पाबंदी लगा दी है, जिसके कारण फूल कारोबारियो पर संकट का बादल मंडराने लगा है. इस कारोबार से जुड़े लोगों ने बताया कि जैसे-जैसे लॉकडाउन की आहट सुनाई दे रहा है मन भयभीत होता जा रहा है.

मिनी काशी में ठप पड़ा फूलो का कारोबार

मिनी काशी के नाम से मशहूर विश्वामित्र की पावन नगरी बक्सर, फूल कारोबार के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. एक तरफ जंहा उत्तरायणी गंगा में स्नान करने के लिए बिहार के अलावे, उत्तर प्रदेश, झारखण्ड, से लाखों श्रद्धालु यहां आते है, जिनके द्वारा धार्मिक कार्यों और मंदिरों में फूलों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया जाता है, साथ ही शाहाबाद के अलग- अलग शहरी एवं ग्रामीण इलाकों में फूल की सप्लाई किया जाता है. लेकिन धार्मिक स्थलों पर पूजा पाठ बन्द हो जाने के कारण फूलो की मंडी में सन्नाटा पसरा हुआ है. शादी विवाह वाले ऑर्डर कैंसल करा रहे है. फूल की खेती करने वाले किसानों को भी कोरोना की दूसरी लहर की धीमी हुई रफ्तार से काफी उम्मीदें थी. की नए साल में गुलाब की आमद जबरदस्त की गई. इस आशा से कि इस बार नया साल बीते 2 साल के नुकशान का भरपाई करके किया जाएगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं और मंडियों में गुलाब के फूल डंप ही पड़े रह गए. अब उम्मीद आने वाले शादियों के सीजन से है, लेकिन रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक नाइट कर्फ्यू और शादियों में सीमित लोगों के आमंत्रण की गाइडलाइन कारोबारियों के माथे पर चिंता की लकीरें मोटी कर दी है.

क्या कहते है किसान

फूलो कि खेती करने वाले किसानों से लेकर इस कारोबार से जुड़े हुए लोगों से जब जनमित्र के संवाददाता ने बात की तो फूलो की खेती करने वाले किसानों ने बताया कि, 2020 और 2021 के लॉकडाउन ने, पूरी तरह से इस व्यवसाय से जुड़े हुए लोगो को बर्बाद कर दिया. खेतो में लगे फूल के पौधे मवेशियो के निवाला बन गया.

क्या कहते है व्यवसायी

बनारस, पटना ,कलकत्ता से फूलो का कारोबार करने वाले व्यपारियो ने बताया कि, धार्मिक स्थलों पर पूजा पाठ करने पर राज्य सरकार ने जैसे ही पाबन्दी लगाई, फूलो की कारोबार में 60% गिरावट आ गया है. जनवरी से लेकर जुलाई-अगस्त तक होने वाले मांगलिक कार्यो को लेकर नवंबर-दिसंबर महीने में ही आर्डर मिल गए थे. ऑर्डर बुक करने के साथ ही साथ हमने फूल के ऑर्डर भी देने शुरू कर दिए थे. लेकिन नई गाइडलाइन ने सब कुछ बर्बाद कर दिया है. अब तक सैकड़ों आर्डर लोग कैंसिल करवा चुके है. कई ऑर्डर को सीमित कर दिया गया है, जो काम 1 लाख का मिला था उसे घटाकर 10 से 20 हजार में करने के लिए दबाओ लोग बना रहे है. कच्चा माल को रोक कर रखा भी नही जा सकता है. डेकोरेशन के लिए जो कारीगर, फूलो को पहुचाने के लिए जीन मजदूरों को रखा गया था. ऑर्डर कैंसल होने के बाद भी वह पैसा तो लौटाएंगे नही. जिसके कारण चौतरफा नुकशान उठाना पड़ रहा है.

गौरतलब है कि कोरोना की तीसरी लहर का सबसे ज्यादा साइड इफेक्ट फूल करोबारी एवं किसानों के ऊपर देखने को मिल रहा है. मांगलिक कार्य एवं मन्दिरो में पूजा पाठ बन्द हो जाने से फूल कारोबारियो की रोजी-रोटी पर संकट का बादल मंडराने लगा है.

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