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चैता की धुन पर गूंजा अपनापन, मैत्री भोज में पिघली सामाजिक दूरियां

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द जनमित्र डेस्क

बक्सर जिले के सदर प्रखंड अंतर्गत जरीगांवा गांव में आयोजित दो गोला चैता कार्यक्रम सह मैत्री भोज ने सामाजिक एकता और भाईचारे का अनुपम मंजर पेश किया। हजारों की भीड़ ने एक साथ बैठकर भोजन किया और साबित कर दिया कि जाति नहीं बल्कि रिश्ते ही समाज को जोड़ते हैं। सरपंच संघ के अध्यक्ष व करहँसी पंचायत के भावी मुखिया प्रत्याशी अखिलेश चौबे द्वारा आयोजित यह भव्य कार्यक्रम देर रात तक पूरे इलाके में उत्साह की लहरें पैदा करता रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्व सदर विधायक संजय कुमार तिवारी उर्फ मुन्ना तिवारी की पत्नी अनुराधा तिवारी ने फीता काटकर किया। चैता समिति के सदस्यों ने मंच पर उपस्थित सभी अतिथियों और सहयोगियों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया। इसके बाद आयोजित मैत्री भोज में हजारों लोग एक साथ बैठे जहां किसी तरह का भेदभाव या दूरी नजर नहीं आई।

आयोजन की सबसे बड़ी खासियत रहा दो गोला चैता का महामुकाबला। कमलावास कुंवर और बुढ़ा व्यास के बीच हुई शानदार प्रतिस्पर्धा ने दर्शकों को पूरी रात पंडाल में बांधे रखा। लोकगीतों की मिठास और तालियों की गड़गड़ाहट से माहौल पूरी तरह जीवंत हो उठा।

कार्यक्रम का संचालन कर रहे युवा भाजपा नेता सौरभ तिवारी और छात्र नेता गिट्टू तिवारी ने आयोजक अखिलेश चौबे की सराहना करते हुए कहा कि उनका व्यक्तित्व सेवा और समर्पण का प्रतीक है। बाढ़ हो या सूखा हर मुश्किल में वे लोगों के साथ खड़े रहते हैं जिसकी वजह से समाज में उनकी अलग पहचान बन रही है।

उद्घाटन के बाद अपने संबोधन में अनुराधा तिवारी ने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग एक-दूसरे से दूर होते जा रहे हैं और परंपराओं को भूलते जा रहे हैं। ऐसे में यह आयोजन न सिर्फ सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखता है बल्कि सामाजिक दूरी और भेदभाव को मिटाकर एकता का मजबूत संदेश भी देता है। उन्होंने समिति और पंचायतवासियों को सफल आयोजन के लिए बधाई दी।

आयोजक अखिलेश चौबे ने सभी अतिथियों और पंचायतवासियों का आभार जताते हुए कहा कि समाज सेवा से जो संतोष मिलता है वह किसी भी सुख से बड़ा है। उन्होंने कहा कि उनका जीवन हमेशा जनता की सेवा के लिए समर्पित रहेगा और लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाना ही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है।

समाज के हर वर्ग से जुड़े हजारों लोगों की उपस्थिति इस बात की गवाही दे रही थी कि जो व्यक्ति दिलों को जोड़ता है वही सच्चा सम्मान पाता है। यह कार्यक्रम सिर्फ सांस्कृतिक उत्सव नहीं बल्कि सामाजिक समरसता प्रेम और एकजुटता का जीवंत उदाहरण साबित हुआ।

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