स्थानीय

राजद नेता का आरोप : महोत्सव के नाम पर जिला प्रशासन के अधिकारियों ने मचाई है लूट

Spread the love

विश्वामित्र महोत्सव और शहनाई के जादुगर उस्ताद विस्मिल्ला खा महोत्सव के नाम पर अपने पॉकेट गर्म करने में जुटे है जिला प्रशासन के अधिकारी. राजद जिलाध्यक्ष ने लगाया गम्भीर आरोप, कहा अपने ही जन्मभूमि पर उपेक्षित है विश्व प्रसिद्ध उस्ताद विस्मिल्ला खा, और महर्षि विश्वामित्र.

द जनमित्र | सरिता कुमारी

बक्सर : आज 21 फरवरी को जिले के डुमराँव शहर में, शहनाई के जादूगर भारत रत्न से सम्मानित उस्ताद विस्मिल्ला खा महोत्सव का आयोजन जिला प्रशासन के द्वारा किया जा रहा है. जिसमे देश के कई बड़े बड़े कलाकारों को आमंत्रित किया गया है. उस्ताद के जन्म स्थली डुमराँव में आयोजित होने वाले इस महोत्सव के आड़ में विपक्ष के नेताओ ने जिला प्रशासन पर लूट खसोट करने का गम्भीर आरोप लगाते हुए कहा कि, जिस महान विभूति का जिले में कही भी ना तो एक प्रतिमा है और ना ही उनके नाम पर कोई एक स्मारक है. फिर ऐसे महोत्सव कराने का क्या फायदा. कार्यक्रम के नाम पर अधिकारी केवल अपने पॉकेट गर्म करने में लगे हुए है.

अपने ही घर में उपेक्षित है शहनाई के जादूगर

बिहार के बक्सर में शहनाई के जादूगर भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां को अपने गृह जिले में ही उपेक्षित कर दिया गया. जिले के प्रशासनिक अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण उनके निधन के 18 साल बाद भी उनके यादों को संजोने के लिए कोई पहल नहीं की गई. अब आगे आने वाली पीढ़ियां उस्ताद बिस्मिल्लाह खां को किताबों के पन्नों में ही पढ़ और देख सकेगी.

21 मार्च 1916 को हुआ था जन्म:

भारतरत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां का जन्म 21 मार्च 1916 को डुमरांव स्थित ठठेरी बाजार में हुआ था. इनके पिता का नाम बचई मियां था. जिन्होंने शहनाई वादन की बदौलत पूरे विश्व के पटल पर डुमरांव का नाम रोशन किया. वक्त के साथ ही भारत रत्न से सम्मनित इस अनमोल रत्न की शहनाई का धुन अब अपने ही घर में गुम हो गया.

पूरे जिले में नहीं है कोई प्रतीक चिन्ह:

वहीं डुमरांव की गलियों से देश के चारों दिशाओं में अपने शहनाई की धुन से लोगों को भाव-विभोर करने वाले भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां अपने ही जन्म भूमि पर उपेक्षित हो गए. जबकि उनका 21 अगस्त 2006 में निधन होने के 18 साल बाद उनके यादों को संजोकर रखने के लिए अब तक ना तो जिला प्रशासन के अधिकारियों, और ना ही जनप्रतिनिधियों के द्वारा कोई कदम उठाया गया. आज पूरे जिले में उनके नाम पर न तो कहीं कोई भवन है और ना ही संग्रहालय, स्कूल, कॉलेज या संगीत अकादमी.

क्या कहते है जिला प्रशासन के अधिकारी

उस्ताद विस्मिल्ला खां महोत्सव एवं विश्वामित्र महोत्सव को लेकर उप विकास आयुक्त डॉक्टर महेंद्र पाल ने कहा कि, जब ऐसे महोत्सव का आयोजन होता है तो एक बेहतर समाज की स्थापना होता है. डुमराँव जैसे छोटे शहर से निकलकर पूरे विश्व की पटल पर जिन्होंने शहनाई की पहचान दिलाई, वैसे महान विभूति के जन्म स्थली पर हमलोग है. यह गर्व की बात है. बक्सर अध्यात्म की नगरी है जंहा महर्षि विश्वामित्र ने भगवान राम को शिक्षा दिया.

क्या कहते है राजद नेता

राजद जिलाध्यक्ष शेषनाथ यादव ने जिला प्रशासन पर गम्भीर आरोप लगाते हुए कहा कि, महोत्सव के नाम पर अधिकारी अपने पॉकेट गर्म करने में लगे है. दुख की बात है कि वैसे महान विभूतियों का एक प्रतिमा तक पूरे जिले में नही है.

गौरतलब है कि जदयू जिलाध्यक्ष अशोक यादव, ने जिला प्रशासन के अधिकारियो का बचाव करते हुए कहा कि, राजद जिलाध्यक्ष जिस कुनबे से आते है, वँहा केवल लूट खसोट ही होता है. इसलिए उनकी उस तरह का भावना है. कार्यक्रम के लिए कहि से न कही से राशि की व्यवस्था तो करना ही पड़ता है.

Comment here