बक्सर में निर्माणाधीन चौसा थर्मल पॉवर प्लांट के निर्माण कार्य में लगे मजदूरों ने किया स्ट्राइक. निर्माण कार्य बाधित होने से अधिकारियों में मचा हड़कंप. ससमय बोर्ड रेट के अनुसार मांग रहे है मजदूरी.
द जनमित्र | सरिता कुमारी
बक्सर: जिले के चौसा में 1320 मेगा वॉट के निर्माणाधीन पावर प्लांट के निर्माण कार्य में लगे मजदूरों ने अचानक हड़ताल कर दिया है. सुबह से ही सभी यूनिट में लगे मजदूरों ने कार्य का बहिष्कार कर दिया, जिसके बाद कंपनी के अधिकारियो में हड़कंप मच गया है. कंपनी के वरीय अधिकारी से लेकर पुलिस प्रशासन नाराज मजदूरों को समझाने बुझाने में लगे हुए है. उसके बाद भी मजदूर अपने मांग पर अड़े हुए है, और बार बार मजदूर यूनियन जिंदाबाद के नारे लगा रहे है.
तीन हजार से अधिक मजदूरों ने किया स्ट्राइक
मिली जानकारी के अनुसार चौसा अखौरीपुर लेबर कॉलोनी, और सरेंजा गांव के पास बने लेबर कॉलोनी के 3 हजार से अधिक मजदूरों ने अपनी मांग को लेकर कार्य का बहिष्कार कर दिया है. दोनो कॉलोनी के मजदूरों ने बताया कि जब तक हमारी मांग कम्पनी के अधिकारी नही मान लेते है, हम काम पर नही लौटेंगे. बार बार केवल आश्वासन तो दिया जाता है लेकिन कम्पनी के अधिकारी अपने वादे पूरे नही करते है.

मजदूरों की मांग
L&T के अंदर पॉवर मैक में काम कर रहे रोहतास जिले के मो. इब्राहिम ने बताया की हमारी मुख्य मांग यह है की ससमय हमारी मजदूरी का भुगतान पेमेंट बोर्ड रेट के अनुसार हो और आने जाने का पर्याप्त साधन मिले.
कम्पनी ने एक हजार मजदूर पर दी है दो बसे
स्ट्राइक कर रहे मजदूरों ने बताया कि कम्पनी के द्वारा एक हजार मजदूरों पर मात्र दो बसे दी गई है काम पर जाते समय बस के इंतजार में डेढ़ से दो घंटे लाइन में खड़ा रहना पड़ता है. आते समय भी वही हालात रहता है. 12 घण्टे काम कराते है और समय से पैसा भी नही देते है. हम आठ घण्टे से अधिक काम नही करेंगे और पेमेंट बोर्ड रेट के हिसाब से ही चाहिए, नही तो हम काम पर नही लौटेंगे.
मजदूरो के समस्या पर अधिकारियो ने साधी चुप्पी
मजदूरों के इस समस्या को लेकर जब L&T कम्पनी के अधिकारियों से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने चुप्पी साध ली, और यह कहते हुए टालमटोल करने लगे की हमलोग मीडिया के समाने बोलने के लिए अर्थराईज नही है. यह ठेकेदार और मजदूरों के बीच का ममाला है. बता दे की देश की दूसरी बड़ी बिजली बनाने वाली परियोजना का निर्माण कार्य जिले के चौसा में चल रहा है. जिसके निर्माण कार्य में लगे मजदूरों ने कम्पनी पर शोषण करने का आरोप लगाया है.

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