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मॉडल रेलवे स्टेशन नहीं बना बक्सर, यात्रियों की परेशानी बरकरार

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द जनमित्र | शशि

बिहार के बक्सर रेलवे स्टेशन को मॉडल स्टेशन बनाने की महत्वाकांक्षी योजना अब महज फाइलों के ट्रांसफर का खेल बनकर रह गई है। चार बार जिम्मेदारी बदलने के बावजूद स्टेशन के जीर्णोद्धार का काम अब तक शुरू नहीं हो सका है। प्लेटफॉर्म पर धूल, गड्ढे और भीड़ का आलम जस का तस बना हुआ है, जबकि स्टेशन की आय में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।

रेलवे की इस योजना की शुरुआत में स्टेशन को मेट्रो सिटी के एयरपोर्ट जैसा आधुनिक स्वरूप देने का वादा किया गया था। लेकिन हकीकत में यह सरकारी नौकरशाही की क्लासिक मिसाल बन गई है, जहां फाइलें बनती हैं, कमेटियां बैठती हैं, रिपोर्ट तैयार होती हैं, लेकिन जमीनी काम नजर नहीं आता। अधिकारियों के मुताबिक, प्रोजेक्ट की प्रगति ‘प्रक्रिया में’ है, लेकिन स्थानीय यात्रियों का कहना है कि यह महज खानापूर्ति है।

जिम्मेदारी का खेल: चार बार ट्रांसफर

प्रोजेक्ट की स्वीकृति के बाद जिम्मेदारी चार बार बदली गई। शुरुआत में यह इंडियन रेलवे स्टेशन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (IRSDC) के पास थी। मार्च 2022 में इसे पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (निर्माण दक्षिण) यानी CAO/C/S को सौंपा गया। सितंबर 2022 में दानापुर डिविजनल रेलवे मैनेजर (DRM) ने इसे अपनी गति शक्ति यूनिट को ट्रांसफर कर दिया। और अगस्त 2024 में काम फिर से CAO/C/S हाजीपुर के पास लौट आया।

इस ट्रांसफर की प्रक्रिया में अधिकारियों ने खासी दिलचस्पी दिखाई, लेकिन स्टेशन के रीडेवलपमेंट में कोई प्रगति नहीं हुई। परिणामस्वरूप, स्टेशन की पुरानी समस्याएं—जैसे अपर्याप्त सुविधाएं, भीड़भाड़ और रखरखाव की कमी—यथावत हैं।

सलाहकारों का दौर और रिपोर्टों की बाढ़

रेलवे में किसी भी प्रोजेक्ट से पहले सलाहकारों का खेल शुरू हो जाता है, और बक्सर स्टेशन का मामला इसका ताजा उदाहरण है। मई 2022 में एक कंसल्टेंसी फर्म को हायर करने के लिए 18.35 लाख रुपये का प्रस्ताव पास हुआ। अगस्त में 9.52 लाख रुपये का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया। एजेंसी ने सिक्योरिटी मनी जमा की, समझौते पर हस्ताक्षर हुए, और फिर रिपोर्ट बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई।

सलाहकारों ने KD-1, KD-2 और KD-3 जैसे ड्राफ्ट रिपोर्ट पेश किए, जो स्टेशन को चमकदार भविष्य दिखाने वाले थे। 2023 में कई प्रेजेंटेशन हुए, जहां जोनल जनरल मैनेजर ने सुझाव दिए और बदलाव कराए। आखिरकार मई 2023 में मास्टर प्लान को मंजूरी मिल गई। लेकिन नवंबर 2023 में रेलवे बोर्ड से नया आदेश आया कि योजना में हाई-राइज टॉवर जोड़ा जाए, जिससे प्लान फिर से संशोधित हो गया।

आय में रिकॉर्ड उछाल, लेकिन सुविधाओं में गिरावट

इस सबके बीच बक्सर स्टेशन की आय में तेजी से वृद्धि हो रही है, जो इसकी क्षमता को दर्शाती है। स्टेशन ने अनारक्षित टिकट सिस्टम (UTS) से महज डेढ़ साल में 14 करोड़ 93 लाख 94 हजार 586 रुपये की रिकॉर्ड कमाई की है। दैनिक औसत आय 9 लाख 95 हजार 964 रुपये रही है, जो इसे पूर्व मध्य रेलवे के शीर्ष राजस्व योगदानकर्ताओं में शामिल करता है। वार्षिक राजस्व 104.95 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

अप्रैल 2024 से अगस्त 2025 तक यहां से कुल 16 लाख 14 हजार 152 यात्रियों ने अपनी यात्रा शुरू की। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार और नई ट्रेनों का ठहराव सुनिश्चित किया जाए, तो आय में और तेजी आ सकती है। लेकिन वर्तमान अनदेखी यात्रियों की सुविधाओं पर भारी पड़ रही है।

स्थानीय निवासियों और यात्रियों की मांग है कि रेलवे अब फाइलों के ट्रांसफर से आगे बढ़कर जमीनी काम शुरू करे। क्या यह प्रोजेक्ट कभी पूरा होगा, या महज कागजों में चमकता रहेगा—यह समय बताएगा।

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