जनमित्र/बक्सर: डुमराँव मे कोरोना के तीसरी लहर के तैयारियों के मद्देनजर भाकपा (माले) के डुमराँव विधायक डॉ. अजीत कुमार सिंह ने अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, नोखपुर (अमसारी) का निरिक्षण किया. महामारी के दौरान सदर अस्पताल या अनुमण्डल अस्पताल पर दबाव को कम करने के लिए तथा लोगों को ग्रामीण स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए यह बेहद जरुरी है कि ग्रामीण स्तर पर हमारे स्वास्थ्य केन्द्र सुचारु रूप से कार्य करें. निरिक्षण के दौरान प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, चौगाईं के प्रभारी डॉ. मितेन्द्र कुमार, प्रबंधक श्रीमती चिन्तामणि, भाकपा माले के चौगाईं प्रखण्ड सचिव बिरेन्द्र सिंह, नीरज यादव, बीरन सिंह व अन्य
ग्रामीण उपस्थित रहे. नोखपुर का अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र भवन व मूलभूत सुविधाओं के अभाव में सुचारू रूप से संचालित नहीं है जबकि यहाँ एम.बी.बी.एस डॉक्टर की ड्यूटी रहती है. निरीक्षण के बाद माननीय विधायक ने कहा कि नब्बे के दसक के आखिरी दौर में यहाँ स्वास्थ्य केन्द्र के लिए भवन का निर्माण हुआ था जो भ्रष्टाचार के कारण आज स्वास्थ्य विभाग को हस्तांतरित नहीं हुआ और जनता का लाखों रुपया बर्बाद हो गया. आबादी के हिसाब से भारत के इस तीसरे बड़े राज्य का हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर वर्षों से मानकों से काफी नीचे है. कोरोना महामारी के दो वर्षों में लाखों लोगों की जान गवाने के बाद भी परिस्थिति में कोई खास परिवर्तन नहीं आया है, मानव संसाधन की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ आज भी बिहार में चिकित्सकों व पारामेडिकल स्टाफ की भारी कमी है. राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की अनुशंसाओं के बावजूद इस दिशा में सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति की कमी के कारण पर्याप्त काम नहीं हुआ यहां तक कि कोरोना की दोनों लहरों के बीच तैयारी के लिए मिले अच्छे खासे वक्त में भी नीतीश-मोदी सरकार ने उस स्तर की तैयारी नहीं की जिसकी दरकार थी. डब्लूएचओ
के मानकों के अनुसार प्रति एक हजार की आबादी पर एक चिकित्सक होना चाहिए, किंतु बिहार में 28 हजार से अधिक लोगों पर एक डॉक्टर है. आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में 1899 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं, इनमें महज 439 केंद्र पर ही चार एम.बी.बी.एस चिकित्सक तैनात हैं, जबकि तीन डॉक्टरों के साथ 41, दो के साथ 56 तथा एक चिकित्सक के साथ 1363 पीएचसी पर काम हो रहा है. हमारे कई पीएचसी आज जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं, तो कहीं डॉक्टरों के दर्शन ही नहीं होते, तो कहीं ए.एन.एम के भरोसे ही सब कुछ है. कोविड काल में चिकित्सकों व अन्य कर्मियों की प्रतिनियुक्ति जिले के कोविड अस्पतालों में कर दिए जाने के कारण भी ऐसे कई प्राइमरी हेल्थ सेंटर तथा कम्युनिटी हेल्थ सेंटर हैं जहाँ ताला लटका हुआ है. स्वास्थ्य उप केंद्रों की हालत तो बेहद दयनीय है. आम जनता को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने में सरकार पूरी तरह विफल रही है.

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