खेती-बाड़ी

दो दिवसीय कृषि यांत्रिकरण मेला के नाम पर विभाग ने की खानापूर्ति. 108 यंत्रों का सूची प्रकाशित कर केवल 14-15 यंत्रों का लगाया प्रदर्शनी.

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दो दिवसीय कृषि यांत्रिकरण मेला के नाम पर विभाग ने की खानापूर्ति. 108 यंत्रो का सूची प्रकाशित कर केवल 14-15 यंत्रो का लगाया प्रदर्शनी, निराश होकर लौटे किसान. कहा मेला के नाम पर हो रहा है खानापूर्ति, इसलिए खेतो का काम छोड़कर नही आते है किसान.

द जनमित्र । एस कुमार विमल

बक्सर : जिला के बाजार समिति में कृषि विभाग के द्वारा दो दिवसीय 12 और 13 दिसम्बर को कृषि यांत्रिकरण मेले की शुरुआत जिला अधिकारी अंशुल अग्रवाल ने दीप प्रज्वलित कर की थी, लेकिन हैरानी की बात है कि दो दिवसीय इस कृषि यांत्रिकरण मेले में दो दर्जन भी किसान नही पहुँचे. जिससे डीलरों को मायूस होकर समय से पहले ही मेले को बंद कर लौटना पड़ा. डीलरों ने नाम नही छापने के शर्त पर बताया कि विभाग के द्वारा किसानों के बीच प्रचार प्रसार ही नही किया गया. जिसके कारण किसान नही आये. हालांकि किसानों की अनुपस्थिति को लेकर जब जिला कृषि पदाधिकारी शत्रुघ्न साह से फोन पर बात की गई तो उन्होंने कहा कि हम कोर्ट में काम से आये है. ऐसी कोई जानकारी हमारे पास नही है. विभाग इसका समीक्षा करेगा कि, आखिर किसान कृषि मेले में क्यो नही आये.

किसानों का आरोप

जिले के 11 प्रखण्ड में 2 लाख 22 हजार रजिस्टर्ड किसान है. मेले के पहले दिन 12 दिसम्बर को मात्र 13 किसान ही इस मेले में पहुँचे. वही हालात आज अंतिम दिन भी देखने को मिला. जिसके कारण समय से पहले ही मेले को बंद कर डीलर निकल गए. किसानो के साथ डीलरों का आरोप है कि विभाग के द्वारा मेले का प्रचार प्रसार नही किया गया. जिसके कारण किसानों को जानकारी ही नही हुई.

437 किसानों को 1 करोड़ 66 लाख 14500 रुपये का अनुदान दी है सरकार.

जिला कृषि पदाधिकारी से मिली जानकारी के अनुसार इस बार कृषि मेला से पहले राज्य सरकार के द्वारा जिले के 437 वैसे किसान जो यन्त्र खरीदने के लिए ऑन लाइन किये थे. उनको अनुदान के रूप में राज्य सरकार ने केवल बक्सर जिले में 1 करोड़ 66 लाख 14500 अनुदान की राशि देने की घोषणा की है. उसके बाद भी मात्र 13 किसान ही इसका लाभ उठा पाए मेले में आये किसानों ने बताया कि मेले में वैसे ही यंत्रो को लाया गया है. जिसे खरीद पाना छोटे किसानों के बस की बात नही है. 108 यंत्रो की सूची प्रकाशित कर 14-15 यन्त्र को ही मेले में लाया गया है. उसका भी कीमत बाजार रेट से अनुदान मिलने के बाद भी अधिक हो रहा है. ऐसे में किसान इस मेले में आकर क्या करेंगे.

गौरतलब है कि दो दिवसीय कृषि यांत्रिकरण मेले के नाम पर विभाग ने 1 लाख 50 हजार की राशि खर्च किया है. उसके बाद भी प्रचार प्रसार के अभाव में किसानों तक मेले की जानकारी नही हो पाई. किसानो के पास यंत्रो का परमिट होने के बाद भी बिना यन्त्र की खरीददारी किये ही वह निराश होकर लौट गए.

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