द जनमित्र | शशि
गुरुवार को बक्सर में सवर्ण समाज ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से जुड़े प्रस्तावित कानून के विरोध में एक बड़ा आक्रोश मार्च निकाला। करीब तीन किलोमीटर लंबे इस मार्च में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारी हाथों में तिरंगा लिए और केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार नारे लगाते हुए गोलंबर से शुरू होकर वीर कुंवर सिंह चौक तक पहुंचे, जहां यह मार्च एक विशाल जनसभा में बदल गया।

प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी कानून को तत्काल वापस लेने की मांग की और इसे वर्तमान तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए ‘खतरनाक’ करार दिया। वक्ताओं का आरोप था कि केंद्र सरकार शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने की साजिश रच रही है, जिससे समाज में असमानता और वैमनस्य बढ़ेगा।
युवा वक्ता अंकित कुमार ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह कानून आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से खिलवाड़ है। उन्होंने सवर्ण समाज से जुड़े विधायकों, मंत्रियों और सांसदों से इस मुद्दे पर खुलकर विरोध करने या इस्तीफा देने की मांग की। अंकित कुमार ने कहा, “सवर्ण समाज से पहले ही बहुत कुछ छीन लिया गया था, तब हम चुप रहे। अब हमारे पास केवल शिक्षा बची थी, जिसे भी सरकार छीनना चाहती है।”
उन्होंने सरकार पर समाज को तोड़ने और समुदायों के बीच दुर्भावना फैलाने की नीति अपनाने का आरोप लगाया। कहा कि जो सरकार पहले हिंदुओं की एकता की बात करती थी, वही अब उन्हें बांटने का काम कर रही है।
श्रवण तिवारी ने कहा कि केंद्र सरकार ने आपसी भाईचारे को बिगाड़ने का काम किया है। युवा पीढ़ी एकजुट होकर देश का भविष्य संवारने में लगी थी, लेकिन सरकार की नीतियों ने समाज के बीच खाई बढ़ा दी है।
सभा के अंत में प्रदर्शनकारियों ने एक स्वर में यूजीसी कानून वापस लेने की मांग की और चेतावनी दी कि यदि उनकी आवाज नहीं सुनी गई तो आंदोलन को और व्यापक तथा उग्र रूप दिया जाएगा।


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