द जनमित्र | शशि
नई दिल्ली। लोकसभा में शुक्रवार को उस समय हंगामा मच गया जब भाजपा सांसद सुधाकर सिंह ने सरकार के प्रस्तावित ‘स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर विधेयक 2025’ पर तीखा हमला बोला। सिंह ने उपकर लगाने के प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए गुटखा, पान मसाला और सभी तंबाकू उत्पादों के उत्पादन एवं बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की।

“सेस लगाकर क्या लोगों का स्वास्थ्य सुधर जाएगा?”
सदन में अपने संबोधन में सुधाकर सिंह ने सवाल उठाया, “यदि सरकार वास्तव में जनता के स्वास्थ्य से चिंत है तो सिर्फ़ उपकर लगा कर खानापूर्ति क्यों? गुटखा और पान मसाला जैसी जानलेवा चीजों पर तुरंत बैन लगना चाहिए।” उन्होंने कहा कि प्रस्तावित विधेयक में ‘सिन गुड्स’ (तंबाकू, गुटखा, पान मसाला आदि) पर उपकर लगा कर राजस्व जुटाने का प्लान दरअसल आम आदमी की जेब काटने का नया तरीका है।
राष्ट्रीय सुरक्षा का नाम लेकर पारदर्शिता से बचना चाहती है सरकार: सांसद
सुधाकर सिंह ने विधेयक के नाम में ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ शब्द जोड़े जाने पर भी कड़ा एतराज जताया। उनका आरोप था कि इस शब्द का इस्तेमाल सिर्फ़ इसलिए किया गया है ताकि उपकर से होने वाली आय का हिसाब-किताब जनता के सामने न आए। “यह स्पष्ट है कि नीति-निर्माताओं की प्राथमिकता स्वास्थ्य नहीं, बल्कि राजस्व जुटाना है,” सिंह ने कहा।
विधेयक को सेलेक्ट कमेटी को भेजने की मांग
सांसद ने सदन से अपील की कि इतने संवेदनशील और विवादास्पद विधेयक को सीधे पारित करने की बजाय पहले संयुक्त प्रवर समिति (Select Committee) को भेजा जाए। उन्होंने जोर दिया कि जनहित और पारदर्शिता को सर्वोपरि रखते हुए इस पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए।
बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सबकी सेहत दांव पर
अपने भाषण के अंत में सुधाकर सिंह ने कहा, “कर बढ़ाने या उपकर लगाने से न तो नाबालिगों का इन ज़हरीली चीजों से बचाव होगा और न ही कैंसर जैसी भयानक बीमारियाँ रुकेंगी। एकमात्र रास्ता है – पूर्ण प्रतिबंध। तभी आने वाली पीढ़ियाँ सुरक्षित रहेंगी।”
सुधाकर सिंह की इस दमदार दलील के बाद सदन में काफी देर तक चर्चा चलती रही। कई सांसदों ने भी उनके सुर में सुर मिलाया, जबकि सरकार की ओर से अभी इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है।

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