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अवैध इंजेक्शन-दवाओं की बिक्री पर कार्रवाई की मांग

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द जनमित्र डेस्क

बिहार के बक्सर शहर में किशोरों और युवाओं के बीच तेजी से फैल रहे नशीली दवाओं और इंजेक्शन (सुइयों) के अवैध सेवन ने चिंता की लहर दौड़ा दी है। इस गंभीर समस्या को रोकने के लिए सामाजिक संगठन ‘युवाशक्ति सेवा संस्थान’ ने मोर्चा संभाला है। सोमवार को संस्था के सदस्यों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर शहर की दवा दुकानों पर बिना पर्ची के प्रतिबंधित नशीली दवाएं और इंजेक्शन बेचे जाने के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की।

संस्था के संरक्षक एवं समाजसेवी राम जी सिंह ने बताया कि शहर की कई अंग्रेजी दवा दुकानें बेखौफ होकर स्पास्मोप्रॉक्सीवॉन, कोरेक्स, नाइट्रोवेट, फेनरगन जैसी नशीली दवाएं और इंजेक्शन बिना डॉक्टरी पर्ची के बेच रही हैं। इनका सबसे ज्यादा शिकार 14 से 25 वर्ष तक के किशोर और युवा हो रहे हैं।

राम जी सिंह ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “कुछ दुकानदार महज थोड़े से आर्थिक लाभ के लिए पहचान के नशेड़ियों को आसानी से ये प्रतिबंधित दवाएं और सूइयां थमा देते हैं। हैरानी की बात यह है कि इस अवैध कारोबार में ड्रग इंस्पेक्टर और संबंधित अधिकारियों की मौन सहमति भी दिखाई देती है।”

उन्होंने नशे के खतरनाक दुष्प्रभाव गिनाते हुए कहा, “लगातार नशीले इंजेक्शन लगाने से युवाओं की सोचने-समझने की क्षमता खत्म हो रही है, दिमाग कमजोर पड़ रहा है, किडनी-लिवर जैसे महत्वपूर्ण अंग फेल होने लगते हैं। कई युवा पागलपन जैसी हरकतें करने लगते हैं और धीरे-धीरे मौत के मुंह में चले जाते हैं।”

राम जी सिंह ने कहा कि केवल प्रशासनिक कार्रवाई काफी नहीं है। समाज को भी जागना होगा। “शहर के हर मोहल्ले, हर गली में ऐसे युवा मिल जाएंगे जो इस नशे की गिरफ्त में हैं। अगर अभी नहीं चेते तो आने वाले कुछ सालों में स्थिति भयावह हो जाएगी।”

युवाशक्ति सेवा संस्थान ने शहरवासियों से अपील की है कि वे अपने आसपास नशे की लत में फंसे युवाओं की पहचान करें, उनकी काउंसलिंग कराएं और अवैध दवा बिक्री करने वाले दुकानदारों की सूचना तुरंत पुलिस व प्रशासन को दें।

संस्था का कहना है कि अगर प्रशासन सख्ती दिखाए और समाज जागरूक हो जाए तो बक्सर से इस नशे के खतरे को पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है और हजारों युवाओं की जिंदगी बचाई जा सकती है।

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