द जनमित्र डेस्क
बिहार के लोकप्रिय छठ पर्व की पूर्व संध्या पर जिले के प्राथमिक विद्यालय बलिरामपुर में शनिवार को एक अनोखा सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। यहां के नन्हे-मुन्ने छात्रों ने छठ की परंपराओं को जीवंत करने वाली मनमोहक झांकियां प्रस्तुत कीं, जिससे पूरा विद्यालय परिसर भक्ति और उत्साह के रंगों से सराबोर हो गया। ‘कांच ही बांस के बहंगिया’ और ‘उठो हे सूर्य देव’ जैसे पारंपरिक भजनों की धुनों पर थिरकते बच्चों ने दर्शकों को भावुक कर दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत से ही विद्यालय को एक जीवंत छठ घाट में तब्दील कर दिया गया था। प्रांगण में गन्ने, दूर्वा, केले के पेड़ और रंग-बिरंगी सजावट से सजा मंच ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो गंगा तट का कोई पवित्र घाट हो। बालक पीले धोती-कुर्ते में सजे, माथे पर दूर्वा और कंधे पर गन्ना लटकाए छठव्रतियों के रूप में नजर आए, तो बालिकाएं लाल-पीली साड़ियों में कलश और लोटा थामे सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करने को बेताब दिखीं। झांकियों में बच्चों ने छठ की पूर्णिमा, अर्घ्य दान और सूर्य उपासना के दृश्यों को इतने जीवंत ढंग से चित्रित किया कि उपस्थित अभिभावक और शिक्षक तालियों की गड़गड़ाहट से अभिभूत हो उठे।
प्राचार्य अजीत कुमार ने संवाददाता से बातचीत में कहा, “छठ बिहार की आत्मा है—एक ऐसा पर्व जो वर्ष भर की थकान मिटाकर नई ऊर्जा का संचार करता है। ऐसे आयोजनों से बच्चे अपनी जड़ों से जुड़ते हैं और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का संदेश ग्रहण करते हैं।” वहीं, शिक्षिका अमिता कुमारी ने उत्साह से बताया, “बच्चों में छठ के प्रति जुनून देखने लायक था। उन्होंने न केवल झांकियां तैयार कीं, बल्कि गीतों और नृत्यों के जरिए पर्व की भावना को भी उतारा।”
कार्यक्रम में शिक्षिका गीता कुमारी सिन्हा, गीता कुमारी, शिक्षक रामनारायण प्रसाद समेत समस्त स्टाफ ने बच्चों का हौसला बढ़ाया। झांकियों की तैयारी में प्रियांशी कुमारी, चांदनी कुमारी, अंशिका कुमारी, आशीष कुमार और अभिषेक कुमार जैसे छात्रों का विशेष योगदान रहा। अंत में, सभी ने एकजुट होकर छठ मईया से प्रार्थना की कि यह पर्व सबकी मनोकामनाएं पूरी करे और समाज में एकता व भाईचारे का बंधन मजबूत करे।

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