द जनमित्र | शशि
शारदीय नवरात्र के अवसर पर सोमवार को बक्सर सदर मुख्यालय में भव्य कलश यात्रा का आयोजन किया गया। गोलंबर स्थित महावीर मंदिर प्रांगण से गाजे-बाजे के साथ निकली इस यात्रा में श्रद्धालु जयकारों के साथ मां दुर्गा का आह्वान करते नजर आए। पूरे शहर में भक्ति का माहौल छाया रहा, जहां घरों से लेकर पूजा पंडालों तक कलश स्थापना के साथ मां शैलपुत्री की आराधना की गई।

कलश स्थापना के इस मौके पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता डॉ. राजेश मिश्रा भी शामिल हुए। उन्होंने कहा, “मां दुर्गा शक्ति और साहस की देवी हैं। नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना मुहूर्त में मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है, जिससे भक्तों के संकट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।” डॉ. मिश्रा ने श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य संबंधी सलाह देते हुए कहा कि सप्तमी से विजयादशमी तक बड़ी संख्या में दर्शनार्थी पहुंचते हैं, इसलिए व्रत के दौरान पौष्टिक आहार, हल्का भोजन, पर्याप्त जल सेवन, नियमित नींद और स्वच्छता का ध्यान रखना जरूरी है। आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लें। इस अवसर पर पूजा समिति के अध्यक्ष अरविंद सिंह सहित सभी सदस्य मौजूद थे।
शक्ति की देवी मां दुर्गा की आराधना का अनुष्ठान सोमवार से शुरू हो गया। सुबह से ही शहर भक्तिमय नजर आया, जहां गंगा तट पर लोगों की अच्छी-खासी भीड़ जमा रही। भक्तों ने गंगा स्नान कर मिट्टी के घड़ों में जल भरकर घरों और पंडालों में कलश स्थापित किया। पूजा समितियों के सदस्य गाजे-बाजे के साथ गंगा तट पहुंचे और घड़ों में गंगाजल भरकर पंडालों में स्थापित किया। पंडालों में बज रहे मां भगवती के गीतों और वैदिक मंत्रोच्चार से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। विद्वान पंडितों ने विधि-विधान से कलश स्थापना कराई, जबकि भक्तों ने नए पीले परिधान में पूजा-अर्चना की और दुर्गा सप्तशती का पाठ किया।
आज देवी के दूसरे स्वरूप ब्रह्मचारिणी की पूजा होगी, जो त्याग और तपस्या की प्रतीक मानी जाती हैं।
मंदिरों में सुबह से शाम तक जुटे भक्त
अहले सुबह से ही माता रानी के दर्शन और पूजा के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। शहर के प्रमुख मंदिरों जैसे मेन रोड तुरहा टोली स्थित दुर्गा मंदिर, महात्मा गांधी बड़ा बाजार स्थित दुर्गा मंदिर, बाइपास रोड स्थित मां काली मंदिर, कोइरपुरवा स्थित काली मंदिर समेत अन्य मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहा। श्रद्धालुओं ने मां को फूल-माला और प्रसाद चढ़ाया, जबकि मंदिर परिसर मां दुर्गा के जयघोष से गूंजता रहा। सुबह से देर शाम तक मंदिरों में अच्छी-खासी भीड़ देखी गई।

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