द जनमित्र | शशि
जिले में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से स्थिति चिंताजनक हो गई है। शुक्रवार दोपहर तक गंगा का जलस्तर 59.59 मीटर तक पहुंच गया, जो चेतावनी बिंदु 59.32 मीटर से 23 सेंटीमीटर ऊपर है। खतरे का निशान 60.32 मीटर अब मात्र 73 सेंटीमीटर दूर है। गंगा के जलस्तर में प्रति घंटे दो सेंटीमीटर की तेजी से वृद्धि ने जिला प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। बक्सर, चौसा, सिमरी, ब्रह्मपुर और चक्की प्रखंड पहले से ही बाढ़ के लिए संवेदनशील हैं, और अब तटीय व दियारा क्षेत्रों में पानी फैलने लगा है।




जिलाधिकारी (डीएम) डॉ. विद्यानंद सिंह ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शुक्रवार को रामरेखा घाट का दौरा किया। उन्होंने अधिकारियों को सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए। सावन की सोमवारी को घाटों पर बढ़ने वाली भीड़ के मद्देनजर विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है। डीएम ने बताया कि गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिसके चलते सभी घाटों पर बैरिकेडिंग, लाल झंडियां और चेतावनी बोर्ड लगाने के आदेश दिए गए हैं। नालों की सफाई के लिए भी नगर परिषद को तत्काल कार्रवाई करने को कहा गया है, ताकि बारिश का पानी आसानी से निकल सके।
नाव परिचालन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है, और दोनों उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) को सतत निगरानी का जिम्मा सौंपा गया है। डीएम ने दावा किया कि बाढ़ पूर्व तैयारियों के तहत आश्रय स्थल, सामुदायिक किचन, पेयजल, पशु चारा और दवाओं की पूरी व्यवस्था की गई है। निरीक्षण के दौरान अपर समाहर्ता अरुण सिंह, एसडीएम अविनाश कुमार, नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी, बीडीओ साधु शरण पांडेय और सीओ प्रशांत शांडिल्य मौजूद रहे।
हालांकि, प्रशासन की सक्रियता के बावजूद अंतिम समय में अधूरी तैयारियां चिंता का विषय बनी हुई हैं। बाढ़ के संवेदनशील क्षेत्रों में पानी का फैलाव बढ़ने से स्थानीय लोगों में दहशत है। प्रशासन के सामने अब इस विकट स्थिति से निपटने की बड़ी चुनौती है। स्थिति पर काबू पाने के लिए त्वरित और समन्वित प्रयासों की जरूरत है।




जिलाधिकारी (डीएम) डॉ. विद्यानंद सिंह ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शुक्रवार को रामरेखा घाट का दौरा किया। उन्होंने अधिकारियों को सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए। सावन की सोमवारी को घाटों पर बढ़ने वाली भीड़ के मद्देनजर विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है। डीएम ने बताया कि गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिसके चलते सभी घाटों पर बैरिकेडिंग, लाल झंडियां और चेतावनी बोर्ड लगाने के आदेश दिए गए हैं। नालों की सफाई के लिए भी नगर परिषद को तत्काल कार्रवाई करने को कहा गया है, ताकि बारिश का पानी आसानी से निकल सके।
नाव परिचालन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है, और दोनों उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) को सतत निगरानी का जिम्मा सौंपा गया है। डीएम ने दावा किया कि बाढ़ पूर्व तैयारियों के तहत आश्रय स्थल, सामुदायिक किचन, पेयजल, पशु चारा और दवाओं की पूरी व्यवस्था की गई है। निरीक्षण के दौरान अपर समाहर्ता अरुण सिंह, एसडीएम अविनाश कुमार, नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी, बीडीओ साधु शरण पांडेय और सीओ प्रशांत शांडिल्य मौजूद रहे।
हालांकि, प्रशासन की सक्रियता के बावजूद अंतिम समय में अधूरी तैयारियां चिंता का विषय बनी हुई हैं। बाढ़ के संवेदनशील क्षेत्रों में पानी का फैलाव बढ़ने से स्थानीय लोगों में दहशत है। प्रशासन के सामने अब इस विकट स्थिति से निपटने की बड़ी चुनौती है। स्थिति पर काबू पाने के लिए त्वरित और समन्वित प्रयासों की जरूरत है।

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