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कैदियों को मुख्य धारा से जोड़ने के लिए सरकार ने की नई पहल

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बक्सर सेंट्रल जेल में बंद दुर्दान्त एवं सजायाफ्ता कैदियों को दिया जा रहा है दुग्ध उत्पादन के साथ गाय एवं बकरी पालन का प्रशिक्षण. सजा पूरी कर जेल से छूटने के बाद समाज के मुख्य धारा से जोड़ने की लिए सरकार की नई पहल से उत्साहित है बन्दी…

द जनमित्र । एस कुमार विमल

बक्सर: जिले के केंद्रीय कारागार में बंद दुर्दान्त अपराधियो एवं सजायाफ्ता कैदियों को समाज के मुख्य धारा से जोड़ने के लिए बिहार सरकार के द्वारा जेल के चारदीवारी के अंदर ही इन बंदियो को दुग्ध उत्पादन के साथ ही गाय पालन एवं बकरी पालन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है,जिससे बंदियो में भी उत्साह है. जेल की कालकोठरी से सजा पूरी करने के बाद उन्हें भी उम्मीद जगा है कि अब इन्हें भी एक सुनहरा कल दिखाई दे रहा है. इससे पहले जेल के 60 बंदियो को बांस निर्मित सजावटी समानों के साथ फर्नीचर आदि बनाने का प्रशिक्षण दिया गया था. अब जेल के 30 बंदियो को पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन का प्रशिक्षण एक महीने तक दिया जा रहा है.

क्या कहते है पशुपालन विभाग के चिकित्सक.

जेल में प्रशिक्षण दे रहे पशुपालन विभाग के चिकित्सक डॉक्टर मनोज भारती ने बताया कि प्रशिक्षण दिया जा रहा है. इससे पहले 60 बंदियो को बांस से बनने वाले समाग्री एवं फर्नीचर बनाने के लिए हस्तकला का प्रशिक्षण दिया गया है.

क्या कहते है जेल के अधिकारी

वही जेल अधीक्षक राजीव कुमार ने बताया कि जेल अब सुधार गृह बन गया है. जंहा सभी तरह की कैदियों को साक्षर बनाने से लेकर उनको हुनर मंद बनाया जा रहा है. जेल से सजा पूरी करने के बाद सभी बन्दी समाज के मुख्य धारा से जुड़ सके इसके लिए इनको तरह तरह का प्रशिक्षण दिया रहा है. जिससे कि वह अपराध की दुनिया को छोड़कर समाज के मुख्यधारा से जुड़ सके.

गौरतलब है कि बक्सर केंद्रीय कारा में सजा भुगत रहे कैदियों को जेल प्रशासन के द्वारा साक्षर बनाने से लेकर हुनरमंद बनाने को लेकर एक मुहीम चलाया जा रहा है. जिसका जेल के अंदर बंद कैदी खूब सराहना कर रहे है. कैदियों की माने तो जेल से छूटने के बाद अब उन्हें भी रोजगार के लिए भटकना नही पड़ेगा औऱ सम्मान के साथ वह जीवन जी सकेंगे.

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