जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह के बयान पर बिहार में सियासी भूचाल जीतन राम मांझी के बाद अब माले ने भी किया पलटवार बक्सर पहुँचे माले के राष्ट्रीय महासचिव ने कहा लोकतंत्र में एक ही पार्टी नही हो सकती है सुप्रीम,कई राजनैतिक दलों से ही बनता है लोकतंत्र
द जनमित्र । विमल यादव
बक्सर: 2024 के लोकसभा चुनाव को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बनने वाले महागठबंधन को लेकर विपक्षी पार्टियो की पटना में होने वाले बैठक से पूर्व ही महागठबन्धन के सहयोगी हम पार्टी के नेता संतोष मांझी का मंत्रिमंडल से स्थिफ़ा देने के बाद बिहार में चल रहे सियासी समीकरण का खेल एक बार फिर बिगड़ते दिखाई दे रहा है.

महागठबन्धन की गांठ से जीतन राम मांझी की पार्टी को अलग होते ही जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने छोटे राजनीतिक दलों को छोटे दुकानदार से तुलना कर सियासी भूचाल ला दिया है. जिस पर भाकपा माले ने भी आपत्ति जताई है.
माले के राष्ट्रीय महासचिव ने भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और ललन सिंह पर पलटवार करते हुए कहा कि जीतन राम मांझी और ललन सिंह के बीच क्या चल रहा है. उससे हमारी पार्टी को कोई लेना देना नही. लेकिन जिस तरह से पटना में भारतीय जनता पार्टी के नेता जेपी नड्डा ने बयान दिया था कि एक ही पार्टी अगले 50 साल तक राज करेगी यह लोकतंत्र में सम्भव नही है. वही उन्होंने 23 जून को होने वाले महागठबन्धन की बैठक को लेकर कहा कि आज आम लोगो की रोजी रोटी बचाने के लिए महागठबन्धन समय की मांग है और बिहार में इसका सफल प्रयोग भी हुआ है. लेकिन बीजेपी के नेता बार बार पूछ रहे है कि महागठबन्धन का दूल्हा कौन होगा तो चुनाव में जीते हुए सांसद अपना नेता भी तय कर लेंगे बीजेपी के नेताओ को बेचैन होने की जरूरत नही है.

वही उन्होंने कहा कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश मे यह कहना कि छोटे-छोटे दलों को अपनी दुकानें बंद कर लेना चाहिए केवल बड़े दल ही राज करेंगे यह कहि से सही नही है.लोकतंत्र की खूबसूरती तभी है जब कई छोटे बड़े राजनीतिक दल होंगे और सभी स्वतंत्र रूप से आम लोगो की लड़ाई लड़ेंगे . किसी को छोटा समझना सही नही है.

गौरतलब है कि 23 जून को होने वाले महागठबन्धन की बैठक से पहले ही जीतन राम मांझी के बेटे ने मंत्रिमंडल से स्थिफ़ा देकर गठबंधन के गांठ को ढीला कर दिया है. ऐसे में जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष का ललन सिंह के बयान से बिहार में भूचाल आ गया है. अब गठबन्धन में शामिल होने वाले छोटे छोटे दल के अंदर अस्तित्व को समाप्त हो जाने का डर सताने लगा है. जिसको लेकर यह कायास लगाई जा रही है कि 23 जून से पहले ही गठबन्धन की गांठ खुल न जाये.

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