सरिता कुमारी | द जनमित्र
कैमुर/मोहनिया: नाबालिक के साथ हुआ रेप मामले में शनिवार को स्पेशल प्रोटक्शन आफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस (POCSO) के तहत कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला देते हुए मोहनिया सामूहिक बलात्कार के मामले में दो अपराधियों को 35 साल का श्रम कारावास की सजा सुनाई. वहीं सत्र न्यायाधीश एडीजे आशुतोष कुमार उपाध्याय की विशेष अदालत ने भी दोनों आरोपियों पर 3.33 – 3.33 लाख रुपए का जुर्माना और भुगतान न करने की स्थिति में अतिरिक्त 6 महीने की कैद का फैसला सुनाया है

आपको बता दें कि नवंबर 2019 में मोहनिया शहर में नाबालिक लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार की घटना से लोगों के बीच तनाव फैल गया था जिसके चलते 3 दिनों तक लगातार हमला और आगजनी हुई. पुलिस ने गोलाबारी और लाठीचार्ज की जिसमें दो व्यक्तियो को गोली लगी और कई लोग घायल हुए. आक्रामक भीड़ आरोपी के घर जाने की कोशिश कर रही थी. पीड़िता के वकील मंटू पांडे ने बताया कि जब 15 वर्षीय स्कूली छात्रा 15 नवंबर 2019 को दोपहर के करीब 1:00 बजे प्रैक्टिकल कॉपी खरीद कर घर लौट रही थी तभी मोहनिया स्थित मुंडेश्वरी गेट के पास छात्रा को चार

युवकों ने कार में अपहरण कर लिया और रतवार गांव के पास दुर्गावती नदी के किनारे झाड़ियों में सुनसान जगह पर चाकू की नोक पर सामूहिक दुष्कर्म किया और लड़की के साथ बलात्कार की वीडियो क्लिप भी बनाई. लड़की को उसके परिवार को जान से मारने की धमकी देकर छोड़ दिए थे. 24 नवंबर को सोशल मीडिया पर वीडियो क्लिप वायरल किए जाने के बाद नाराज स्थानीय लोगो ने सड़कों पर आकर दुकानों व घरों पर हमला कर दिया. आरोपी मोहम्मद शाहनवाज उर्फ सोनू, सिकंदर अंसारी, अरबाज आलम के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 (डी) 366, 506, 504, 342, 341, सूचना प्रौद्योगिकी की धारा 67 (ए) और 67 (बी) के तहत 
महिला थाने के साथ मोहनिया कस्बे के पल्लू और मोहम्मद कलाम उर्फ सोनू सभी निवासी (IET) अधिनियम और (POCSO) अधिनियम की धारा 6, 12 (2) और 14 धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया. अगले दिन पीड़िता का सीआरपीसी की धारा 164 के तहत बयान भी दर्ज किया गया. पुलिस ने 3 दिन के भीतर आरोपियों को गिरफ्तार कर 7 दिनों के भीतर 30 नवंबर को अदालत में चार्जशीट पेश की. मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई लेकिन कोई वकील नहीं मिला वहीं दो आरोपी अलग-अलग मुकदमे का सामना कर रहे हैं क्योंकि अपराध के समय एक नाबालिग था दूसरा वयस्क-बच्चा था अभियोजन पक्ष द्वारा 16 गवाहों और बचाव पक्ष से दो गवाहों हो का परीक्षण किया गया 24 फरवरी को अदालत में

दो आरोपी मोहम्मद शाहनवाज उर्फ सोनू व सिकंदर अंसारी को अपराध के लिए दोषी पाया. कार्यवाही के लिए 4 मार्च की तारीख तय की गई और अदालत में सारे दस्तावेज पेश किए गए. अदालत के फैसले से नाखुश अभिभावक का कहना है कि ऐसे जघन्य अपराध में आरोपियों को मौत की सजा मिलनी चाहिए. जिसके लिए वे उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय जाएंगे


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