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स्वास्थ्य व्यवस्था तो खुद आईसीयू में है कोरोना का मुकाबला कैसे करेगा : विधायक अजीत कुमार सिंह

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बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था तो खुद आईसीयू में है, कोरोना का मुकाबला कैसे करेंगे- अजीत सिंह

जनमित्र/बक्सर: वैश्विक महामारी के दौर मे अनुमंडलीय अस्पताल डुमराँव का निरीक्षण स्थानीय विधायक अजीत कुमार सिंह ने किया . 100 बेड वाले इस अनुमंडलीय अस्पताल के दायरे में 12 लाख की आबादी आती है . अस्पताल के बदहाली का आलम यह है कि अस्पताल में डॉक्टर्स के 30 पद स्वीकृत है जबकि सिर्फ 13 डॉक्टर्स बहाल हैं . जिनमें सिर्फ 4 डॉक्टर्स ही ड्यूटी पर उपस्थित मिले . इनमे भी डॉ. रश्मि सिंह पिछले दो वर्षों से ज्यादा समय से छुट्टी पर हैं, जबकि डॉ. माला सिन्हा पिछले 5 महीने से छुट्टी पर हैं. हॉस्पिटल में नर्स के 50 पद स्वीकृत हैं जिनमें 26 नर्स बहाल हैं इनमे भी 10 नर्स अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर पदस्थापित हैं . अस्पताल के पास सिर्फ एक ही एम्बुलेंस कार्यरत है .

अल्ट्रासाउंड की मशीन तो है लेकिन उसके लिए सक्षम डॉक्टर और सहायक नहीं हैं . एक एक्सरे मशीन हाल ही में आयी है जिसके लिए तीन की जगह दो ही तकनिकी सहायक कार्यरत हैं . अस्पताल के उप-अधीक्षक डॉ. अनिल भट्ट ने बताया की अस्पताल में तृतीय श्रेणी और चतुर्थ श्रेणी के एक भी पद स्वीकृत नहीं है. लैब तकनीशियन के पांच पद स्वीकृत है लेकिन सभी खाली है. निश्चित रूप से खून, पेशाब एवं अन्य छोटी-बड़ी जाँच की सुविधा भी नदारद ही है. ऑपरेशन असिस्टेंट के दो पद स्वीकृत है दोनों खाली हैं, जिसके कारण आपातकालीन कोई ऑपरेशन करना संभव नहीं हैं. अस्पताल में कोई फिजिशियन नहीं हैं. इस महामारी के दौर में भी अस्पताल के पास कोई वेंटिलेटर नहीं है. फार्मासिस्ट के पांच स्वीकृत पदों में सिर्फ एक बहाल हैं. कुल मिलाकर अस्पताल के लिए मानक के अनुरूप स्वीकृत 109 पदों में से सिर्फ 44 पदों पर बहाली हुई है. मतलब अस्पताल के 60 फीसदी पद खाली है. उपलब्ध दवाइयों की सूचि में एक तिहाई दवाइयां हमेशा खत्म ही रहती हैं . बुखार के लिए इस्तेमाल में आने वाली पैरासिटामोल तक अस्पताल में उपलब्ध नहीं है. अस्पताल के नाम पर एक अच्छी बिल्डिंग है जहाँ सबकुछ भगवान भरोसे ही चल रहा है. ये है नितीश सरकार के स्वास्थ्य विभाग के विकास का नमूना.

डुमराँव विधायक ने कहा कि बिहार की पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था चौपट हो चुकी है . इस व्यवस्था को रसातल में पहुंचाने के लिए लगातार स्वास्थ्य बजट में कटौती की जा रही है. कोरोना संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती मरीज के परिजन लगातार फोन करके हमें बता रहें हैं कि ऑक्सीजन भी मरीजों को नहीं मिल रहा है. मरीजों को डॉक्टर देखने तक नहीं आ रहे हैं. अस्पताल में बेड भर जाने के कारण परिजन अपने मरीजों के साथ घंटों इंतजार के बाद वापस भी लौट जा रहे हैं. वहीं, अस्पताल में डॉक्टरों द्वारा इस्तेमाल किए गए PPE किट को भी अस्पताल के बाहर खुले आसमान के नीचे फेंक दिया जा रहा है. बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था तो खुद आईसीयू में है, मुंह बाए खड़े कोरोना का मुकाबला कैसे करेंगे . विधायक ने कहा कि सरकार से मांग करते हैं कि अविलम्ब सभी खाली पदों पर नियुक्ति किया जाये . सबके लिए वैक्सीन का प्रावधान करें . जिला स्तर पर आरटीपीसीआर जांच की व्यवस्था का विस्तार करें . पर्याप्त संख्या में एंबुलेंस सेवा की व्यवस्था करें . पर्याप्त संख्या में एंबुलेंस सेवा की व्यवस्था करें . प्रखंड व अनुमंडल स्तर के अस्पतालों में ऑक्सीजन व जरूरी दवाओं के साथ इमर्जेंसी वार्ड की व्यवस्था की जाए. सभी जिला अस्पतालों में आईसीयू की व्यवस्था की जाए और कोविड बेडों की संख्या तत्काल बढ़ाई जाए.

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