द जनमित्र डेस्क
बक्सर जिला प्रशासन ने दुर्गापूजा तथा दशहरा पर्व को लेकर सुरक्षा व्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान देते हुए नए दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की जाएगी और पूजा समितियों के दावों की अचानक जांच भी की जाएगी।

प्रतिमा निर्माण में प्लास्टर ऑफ पेरिस का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। मूर्तियां मिट्टी और बांस जैसी प्राकृतिक सामग्री से ही बनाई जाएंगी। पारा, कैडमियम, आर्सेनिक, सीसा और क्रोमियम जैसे जहरीले रासायनिक रंगों पर रोक लगा दी गई है। केवल पानी में घुलनशील और गैर-विषैले प्राकृतिक रंगों का ही प्रयोग करना होगा।
प्रतिमा की ऊंचाई अधिकतम 20 फीट और ऊपरी ढांचे की ऊंचाई 40 फीट से अधिक नहीं होनी चाहिए। पंडाल की सजावट में थर्मोकोल और सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल मना है।
मूर्ति विसर्जन नदियों या प्राकृतिक तालाबों में नहीं, बल्कि कृत्रिम तालाबों में ही होगा। पर्याप्त संख्या में कृत्रिम तालाब बनाने के निर्देश दिए गए हैं। विसर्जन से पहले फूल, कपड़े और प्लास्टिक जैसी सजावटी वस्तुएं प्रतिमा से अलग करनी होंगी। विसर्जन स्थल पर कचरा जलाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
कानून-व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन ने सख्ती बरती है। पूजा पंडालों और जुलूसों में आपत्तिजनक झांकियां, भड़काऊ नारेबाजी तथा प्रतिबंधित हथियारों का प्रदर्शन नहीं होने दिया जाएगा। डीजे और अश्लील गानों का प्रयोग प्रतिबंधित रहेगा। रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर बजाने पर पूर्ण पाबंदी रहेगी।
सभी पूजा पंडाल, प्रतिमा स्थापना और जुलूस के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। जुलूसों की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी कराई जाएगी। सोशल मीडिया पर धार्मिक या जातीय भावनाएं भड़काने वाली सामग्री पोस्ट करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
रावण वध और विसर्जन स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे, वॉच टावर, एंबुलेंस, चिकित्सकीय दल, क्यूआरटी और एसडीआरएफ की व्यवस्था की जाएगी। जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि आस्था के साथ पर्यावरण की रक्षा करें और दुर्गापूजा तथा दशहरा को शांति, सौहार्द व सुरक्षित माहौल में मनाएं।

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