पर्यावरण

अमेरिका ने इस आदमी को मारने के लिये 638 बार प्लानिंग की थी.

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राघवेंद्र दुबे , वरिष्ठ पत्रकार

जनमित्र – फिदेल कास्त्रो रूज़. यानी फिदेल कास्त्रो. क्यूबा की क्रांति के महानायक. क्रांति के कालजयी, रोमांटिक और रहस्यमयी प्रतीक बन चुके चे गेवेरा के वरिष्ठ साथी और हीरो. एक समय दुनिया में किसी भी हलके ( फील्ड ) का , साहित्य, चिंतन , विज्ञान , कला ,क्रांति और राजनीति का कोई ऐसा कद्दावर शख्स नहीं था जिसके पं नेहरू से दोस्ताना रिश्ते नहीं थे. भारत और नेहरू – गांधी परिवार से फिदेल कास्त्रो के भी बहुत अच्छे सम्बन्ध थे और वह इंदिरा गांधी को अपनी बहन मानते थे. 1983 के नयी दिल्ली में आयोजित गुट निरपेक्ष शिखर सम्मेलन में कास्त्रो और इंदिरा से मुलाकात हुई. कास्त्रो इसमें क्यूबा के डेलिगेशन के साथ आये थे. तब उन्होंने कहा था – ‘ हमने 1979 में पिछला गुट निरपेक्ष सम्मेलन हवाना में किया था. अगला सम्मेलन मेरी बहन इंदिरा गांधी के यहां हो रहा है. इस बात की मुझे बेहद खुशी है. ‘ यह कहते उन्होंने इंदिरा को अचानक गले लगा लिया.

कास्त्रो हैरान करने और किसी के दिल – दिमाग पर कब्जा कर लेने वाले वह अप्रतिम कम्युनिस्ट नेता थे , दुनिया जिनका लोहा मानती थी. वह विलक्षण वक्ता थे. संयुक्त राष्ट्र में सबसे लंबा भाषण देने का गिनेस रेकॉर्ड उनके नाम दर्ज है। कास्त्रो ने 29 सितंबर 1960 को संयुक्त राष्ट्र में 4 घंटे 29 मिनट का भाषण दिया था. क्यूबा में 1986 में 7 घंटे 10 मिनट का भाषण दिया था.

‘ द न्यू यॉर्क पोस्ट ‘ के हवाले से बताया जाता है कि फिदेल कास्त्रो को अमेरिका की सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी ने 638 बार मारने की प्लानिंग की थी. इसमें जहर की गोलियां, जहरीली सिगार, जहरीला सूट पहनाने जैसे प्लान शामिल थे, लेकिन कास्त्रो हर बार बच निकले. अमेरिका की ओर से लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों को 45 साल तक झेलने वाले क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो ने आइजनहावर से लेकर क्लिंटन तक 11 अमेरिकी राष्ट्रपतियों का सामना किया. जॉर्ज डब्ल्यू बुश के शासनकाल में उन्हें सबसे ज्यादा विरोध का सामना करना पड़ा.

1962 में शीत युद्ध के दौरान फिदेल कास्त्रो ने सोवियत संघ को अपनी सीमा में अमेरिका के खिलाफ मिसाइल तैनात करने की मंजूरी देकर दुनिया को सकते में ला दिया था. कास्त्रो के इस कदम ने दुनिया को परमाणु युद्ध के मुहाने पर ला दिया था. मॉस्को ने अमेरिका से महज 144 किलोमीटर दूर स्थित आइलैंड पर मिसाइल तैनात करने की मंजूरी मांगी थी.

फिदेल कास्त्रो ने क्यूबा की क्रांति के जरिए ही फुल्गेंकियो बतिस्ता की तानाशाही को उखाड़ फेंका और सत्ता में आए थे और उसके कुछ समय बाद ही क्यूबा के प्रधानमंत्री बने थे. इसके बाद से ही फिदेल कास्त्रो अमेरिका के निशाने पर थे. फुल्गेंकियो बतिस्ता को अमेरिका समर्थित नेता माना जाता था. हर तरह से पतन की ओर जाते इस दौर में स्वाभाविक है कि लोगों को पं नेहरू और इंदिरा की याद आएगी ही.
कोई फर्क नहीं पड़ता अगर मेरा कोई साथी रिटायर्ड जिल्ला जज नींद में भी बड़बड़ा रहा है — राम लला … राम लला. दरअसल वह नव उदारीकरण के दौर के नवमध्यवर्ग का प्रतिनिधि चरित्र है , जिसके अपने आस्तित्वगत बोध की जड़ें सूख चुकी हैं. वह किसी मॉल की खुद ब खुद चलती सीढ़ियों की भीड़ में केवल कंज्यूमर है , मनुष्य नहीं.

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