जनमित्र/सासाराम: कहते हैं मदद कुछ इस तरह से करो की दायां हाथ की खबर बायां हाथ को न हो. आज के इस दौर में लोग जहाँ मदद कम और प्रचार ज़्यादा करते हैं. सेल्फी और विडिओ बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर प्रंशसा का पात्र बनना चाहते हैं. वहीँ फैज़ सिद्दीकी ने वैसे परिवारों की मुलभुत आवश्यकताओं का ध्यान रखा जिनके घर पर चूल्हा तब जलता था जब वो काम करते थे और ऐसा एक या दो दिन नहीं बल्कि पुरे लॉक डाउन के दौरान फैज़ बेहद ख़ामोशी से लोगों को मदद भेजते रहे . बीती रात जब फैज़ सिद्दीकी को दिल्ली से आल इंडिया उलेमा बोर्ड के प्रधान महासचिव जनाब रशीद नसीम फ़ोन
कर बिहार के मौजूदा हालत का जायज़ा लिया फैज़ सिद्दीकी ने उलेमा बोर्ड से बिहार के गरीबों के हक़ में भी कुछ करने का निवेदन किया . जनाब रशीद नसीम ने भी इसमें दिलचस्पी दिखाई और बिहार के कुछ लोगों से फ़ोन पर बात भी की जिनकी मदद फैज़ सिद्दीकी करते आ रहे हैं. जनाब रशीद नसीम ने बिहार को उलेमा बोर्ड से भी जल्द ही कुछ मदद देने का आश्वसन दिया और फैज़ सिद्दीकी को इस नेक कार्य के लिए आज उन्हें सम्मानित भी किया गया. फैज आगे कहते हैं कि हमारा यह काम निरंतर जारी रहेगा क्योंकि इंसानियत से बढ़कर कोई और काम नहीं हो सकता.
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