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चौसा बाजार में रामलीला मंच पर तालाबंदी से विवाद, स्थानीय लोगों ने किया हंगामा

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द जनमित्र डेस्क

बक्सर जिले के चौसा बाजार में सवा सौ साल पुरानी रामलीला के मंच पर ताला लगाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया। चौसा नगर पंचायत की कार्यपालक पदाधिकारी रानी कुमारी ने साक्षरता भवन सह रामलीला मंच पर दूसरा ताला लगवा दिया, जिसके बाद स्थानीय निवासी नाराज हो गए और मौके पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। लोगों ने कार्यपालक पदाधिकारी के खिलाफ नारेबाजी की और उनसे माफी मांगने की मांग की।

यहां 1925 से रामलीला का आयोजन हो रहा है। इस बार पांच दिन का मंचन पूरा हो चुका था और चार दिन शेष थे। ऐसे में रामलीला के बीच अचानक तालाबंदी किए जाने से विवाद गहरा गया। हंगामे की खबर मिलते ही मुफस्सिल थानाध्यक्ष शंभू भगत पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने लोगों को शांत करने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी कार्यपालक पदाधिकारी को बुलाकर माफी मंगवाने की मांग पर डटे रहे। उनका कहना था कि सिर्फ ताला खोल देना काफी नहीं है।

उपमुख्य पार्षद प्रतिनिधि विकास राज ने कहा कि ताला लगाने से पहले नगर पंचायत के जनप्रतिनिधियों से चर्चा कर लेनी चाहिए थी। उन्होंने बताया कि नगर पंचायत गठन के बाद पिछले चार वर्षों से रामलीला शांतिपूर्ण ढंग से चल रही थी। पांच दिन मंचन के बाद अचानक तालाबंदी करना समझ से बाहर है। उन्होंने आशंका जताई कि इससे दुर्गापूजा का माहौल भी प्रभावित हो सकता है।

स्थानीय निवासी धनजी तिवारी ने कहा कि कार्यपालक पदाधिकारी पहले भी रामलीला के दौरान निरीक्षण कर चुकी हैं और उन्हें पता था कि पांच दिनों से मंचन चल रहा है। इसके बावजूद पहले से लगे ताले के ऊपर दूसरा ताला लगा दिया गया। उन्होंने कहा कि भवन की चाबी आयोजकों के पास रहती है और रात में मंचन होता है, इसलिए बीच में ताला लगाने की क्या जरूरत थी। अभिमन्यु सिंह कुशवाहा ने आरोप लगाया कि इस कार्रवाई से लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने कहा कि चौसा का रामलीला मंच स्थानीय लोगों की आन-बान-शान का प्रतीक है और जिम्मेदारों को इसका जवाब देना चाहिए।

कार्यपालक पदाधिकारी रानी कुमारी ने विवाद पर सफाई देते हुए कहा कि वे सनातन विरोधी नहीं हैं और मामले को जानबूझकर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। उनके अनुसार जिस भवन को रामलीला मंच कहा जा रहा है वह वास्तव में साक्षरता भवन है और सार्वजनिक उपयोग के लिए है। उन्होंने बताया कि बाजार में नाली निर्माण का निरीक्षण करते समय भवन के अंदर जाना चाहती थीं लेकिन चाबी नहीं मिली, इसलिए अलग से ताला लगवा दिया ताकि संबंधित लोगों के आने पर पता चल सके कि ताला किसने लगाया है।

उन्होंने कहा कि भवन की चाबी लिखित रूप से सौंपने की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी ताकि रामलीला के बाद उसका दुरुपयोग न हो। ईओ के मुताबिक पहले भी भवन में शराब की बोतलें मिलने की सूचना मिली थी। विवाद सामने आने के बाद उन्होंने कर्मी को ताला खोलने के लिए भेज दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भवन आगे भी सार्वजनिक कार्यों के लिए उपलब्ध रहेगा और रामलीला बाधित करने का उनका कोई इरादा नहीं था।

फिलहाल विवाद के केंद्र में भवन के सार्वजनिक उपयोग और 1925 से चली आ रही रामलीला की परंपरा के बीच संतुलन का सवाल बना हुआ है। एक तरफ कार्यपालक पदाधिकारी भवन के रखरखाव और सार्वजनिक इस्तेमाल की बात कर रही हैं तो दूसरी तरफ स्थानीय लोग रामलीला के बीच तालाबंदी को अनुचित करार दे रहे हैं।

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