द जनमित्र डेस्क
भाकपा-माले और उसके युवा संगठन रिवॉल्यूशनरी यूथ एसोसिएशन (आरवाईए) ने गोपालगंज जिला अदालत द्वारा आरवाईए के राज्य अध्यक्ष कमरेड जितेंद्र पासवान और उनके साथी कमरेड श्रीराम कुशवाहा को हत्या के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के विरोध में राज्यव्यापी कार्यक्रम के तहत डुमरांव में बड़ा प्रतिवाद जुलूस निकाला।

जुलूस डुमरांव बाजार से शुरू होकर शहीद स्मारक होते हुए नया थाना के समक्ष पहुंचा। प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारे लगाए- “कमरेड जितेंद्र पासवान को न्याय दो!”, “फर्जी मुकदमे में आजीवन कारावास क्यों? नीतीश सरकार जवाब दो!”, “विपक्ष रहित भारत बनाने की भाजपाई साजिश को ध्वस्त करो!”, “विपक्ष की आवाज दबाने की भाजपाई साजिश नहीं चलेगी!”, “जदयू मंत्री सुनील कुमार प्रतिशोध की राजनीति बंद करो!” और “नीतीश सरकार विपक्ष के नेताओं को फर्जी मुकदमों में फंसाना बंद करो!”।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, गोपालगंज जिला अदालत ने कमरेड जितेंद्र पासवान (माले राज्य कमिटी सदस्य एवं आरवाईए राज्य अध्यक्ष) और कमरेड श्रीराम कुशवाहा (40 वर्ष, कोरेयां, भोरे) को अटल पांडेय हत्याकांड में दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास के साथ 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। इस मामले में पहले से ही पांच अन्य निर्दोष लोग आजीवन कारावास काट रहे हैं।
भाकपा-माले के जिला सचिव नवीन कुमार ने जुलूस को संबोधित करते हुए कहा कि यह पूरा मामला जदयू मंत्री सुनील कुमार के राजनीतिक प्रतिशोध का नतीजा है। 2020 के विधानसभा चुनाव में भोरे सीट से माले उम्मीदवार जितेंद्र पासवान को मात्र 400 वोटों से साजिशपूर्ण तरीके से हराया गया था और जदयू प्रत्याशी सुनील कुमार को विजयी घोषित किया गया। अब विपक्ष के मजबूत नेता को रास्ते से हटाने के लिए फर्जी मुकदमे में फंसाकर आजीवन कारावास की सजा दिलाई गई है। उन्होंने इसे माले के युवा नेता मनोज मंजिल के बाद दूसरी ऐसी घटना बताया और कहा कि यह विपक्ष की आवाज दबाने तथा विपक्ष रहित भारत बनाने की भाजपा-नीतीश गठबंधन की साजिश का हिस्सा है।
जुलूस को डुमरांव सचिव धर्मेंद्र सिंह यादव, आरवाईए जिला संयोजक राजदेव सिंह, खेग्रामस के वरिष्ठ नेता ललन राम और महिला नेत्री पूजा यादव ने भी संबोधित किया।
प्रतिवाद में बक्सर नगर सचिव ओम प्रकाश, माले नेता मानरूप पासवान, जाबिर कुरैशी, हरेंद्र पासवान, संजय कुमार सिंह, आरवाईए नेता रवि यादव, बाबूलाल राम, नासिर हुसैन, ऐपवा नेत्री पूजा कुमारी, रविरंजन सिंह, दीपू समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल थे।


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