द जनमित्र डेस्क
ऑनलाइन गेमिंग और सट्टे के नाम पर लोगों को ठगने वाले एक बड़े साइबर क्राइम नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए बक्सर पुलिस ने रविवार को 18 अपराधियों को गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई गुप्त सूचना के आधार पर की गई, जिसमें पुलिस ने किराए के एक मकान से ठगी का पूरा अड्डा उजागर कर दिया। एसपी शुभम आर्य ने बताया कि यह गिरोह दैनिक आधार पर 4-5 लाख रुपये की ठगी कर रहा था, और अब मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से गहन जांच चल रही है।

नगर थाना बक्सर में रविवार शाम आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में एसपी शुभम आर्य ने विस्तार से जानकारी साझा की। उन्होंने कहा, “पीपी रोड स्थित आईसीआईसीआई बैंक के पास किराए के एक मकान में ये अपराधी फर्जी गेमिंग ऐप्स बनाकर ठगी कर रहे थे। टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए ये ऐप्स लोगों तक पहुंचाए जाते थे। भोले-भाले लोग ऐप पर रजिस्टर कर पैसे निवेश करते, फिर धीरे-धीरे उनके बैंक खाते खाली कर दिए जाते।”
पुलिस ने छापेमारी के दौरान ठगी के सामान के रूप में 9 एक्टिव बैंक पासबुक, 5 चेकबुक और 82 एटीएम कार्ड बरामद किए। एसपी के मुताबिक, आरोपी पहले भी कई बैंक खातों का इस्तेमाल कर चुके थे। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम को विभिन्न खातों में ट्रांसफर किया जाता था, जिससे मनी ट्रेल छिपाई जाती। साइबर थाने में कांड संख्या 55/25 दर्ज कर ली गई है, और पुलिस अब ठगी के पैसे के स्रोतों व नकली खातों की पड़ताल कर रही है।
गिरफ्तार अपराधी छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, ओडिशा और बिहार के विभिन्न जिलों से ताल्लुक रखते हैं। इनमें कैमूर, सारण, सिवान, बांका व रोहतास के निवासी शामिल हैं। एसपी ने खुलासा किया कि यह एक संगठित गिरोह है, जिसके मुख्य सूत्रधार अजीत कुमार जयसवाल और अमन जयसवाल हैं। ये लोग बाहर के राज्यों से युवाओं को बुलाकर अपराध में शामिल करते थे। गिरोह के अन्य सदस्यों व नेटवर्क की तलाश में विभिन्न जिलों व राज्यों में छानबीन तेज कर दी गई है।
एसपी शुभम आर्य ने कहा, “साइबर ठगी के बढ़ते मामलों पर अंकुश लगाने के लिए बक्सर पुलिस सतत निगरानी रखे हुए है। यह कार्रवाई ऐसी गतिविधियों पर सख्त संदेश देगी। हम हर स्तर पर साइबर अपराध के खिलाफ अभियान चला रहे हैं।” पुलिस का मानना है कि इस सफल ऑपरेशन से क्षेत्र में साइबर क्राइम पर काफी हद तक रोक लगेगी। आगे की जांच जारी है, और पुलिस अन्य संदिग्धों पर नजर बनाए हुए है।

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