द जनमित्र डेस्क
जिले के सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को आवारा कुत्तों के हमले से बचाने के लिए प्रशासन ने अब ठोस कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। राज्य स्वास्थ्य समिति के निर्देश पर सदर अस्पताल सहित जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में आवारा कुत्तों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगाने की तैयारी की जा रही है। साथ ही एंटी-रैबीज वैक्सीन की पर्याप्त उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाएगी।

इस व्यवस्था की जिम्मेदारी स्वास्थ्य उपाध्यक्ष डॉ. नमिता सिंह को जिला स्तर पर नोडल अधिकारी बनाया गया है। डॉ. सिंह की देखरेख में अस्पताल परिसरों की नियमित सफाई, रख-रखाव और सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ आवारा कुत्तों को परिसर से दूर रखने के प्रभावी उपाय किए जाएंगे।
डॉ. नमिता सिंह ने बताया कि इस संबंध में आदेश का अनुपालन शुरू कर दिया गया है, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण कुछ व्यवहारिक चुनौतियां सामने आ रही हैं। उन्होंने सुरक्षा कर्मियों की संख्या बढ़ाने के लिए जिला प्रशासन को पत्र लिखकर अवगत कराया है और अस्पताल प्रबंधकों से भी सक्रिय सहयोग मांगा जा रहा है।
सदर अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था अत्यंत कमजोर
सदर अस्पताल, जो जिले का सबसे बड़ा सरकारी स्वास्थ्य केंद्र है, वहां सुरक्षा की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। डॉ. सिंह के अनुसार अस्पताल की चार मंजिलों पर हर तल पर कम से कम चार सुरक्षा कर्मियों की जरूरत है। इसके अलावा शिशु गहन चिकित्सा केंद्र (SNCU) में चार और दोनों मुख्य प्रवेश द्वारों पर दो-दो सुरक्षाकर्मियों की आवश्यकता है। इस तरह कुल 24 सुरक्षा कर्मियों की मांग है, जबकि वर्तमान में महज 9 कर्मी ही तैनात हैं।
हर महीने करीब 2000 लोगों को लगता है एंटी-रैबीज इंजेक्शन
सिविल सर्जन डॉ. शिव कुमार प्रसाद चक्रवर्ती ने बताया कि जिले में प्रतिमाह औसतन 2000 लोगों को एंटी-रैबीज इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं। इनमें कुत्तों के साथ-साथ बंदरों के काटने के मामले भी बड़ी संख्या में शामिल रहते हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि शहर में आवारा कुत्तों और बंदरों का आतंक लगातार बढ़ रहा है, जिससे आमजन परेशान है। ऐसे में अस्पतालों में कुत्तों के प्रवेश पर रोक लगाने का यह सरकारी फैसला मरीजों की सुरक्षा के लिए बहुत कारगर साबित होगा।
यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब पूरे देश में आवारा कुत्तों से जुड़े मामले सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुके हैं और सार्वजनिक स्थानों खासकर अस्पतालों-स्कूलों से इन्हें हटाने के निर्देश जारी हो रहे हैं। बक्सर जिला प्रशासन की यह पहल मरीजों और उनके परिजनों के लिए राहत लेकर आएगी, बशर्ते प्रस्तावित सुरक्षा व्यवस्था समयबद्ध तरीके से लागू हो सके।


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